अलवर के सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा पर सवाल, 114 में से 92 संस्थान बिना फायर एनओसी संचालित
मरीजों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
अलवर जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। मई 2026 की फायर एनओसी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 114 सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में से 92 संस्थान बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। यह स्थिति मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अस्पताल ऐसे स्थान होते हैं जहां बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए मौजूद रहते हैं और किसी भी आपात स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का होना बेहद जरूरी माना जाता है।
जिला अस्पताल सुरक्षित, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र पिछड़े
रिपोर्ट के अनुसार अलवर जिला अस्पताल और जिले के दोनों उप जिला अस्पतालों ने फायर सुरक्षा मानकों की पालना करते हुए आवश्यक फायर एनओसी प्राप्त कर रखी है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) इस मामले में काफी पीछे हैं। जिले के 76 पीएचसी में से केवल 11 केंद्रों के पास फायर एनओसी है, जबकि 65 केंद्र बिना इस सुरक्षा प्रमाणन के संचालित हो रहे हैं। वहीं 25 सीएचसी में से केवल 8 केंद्रों ने फायर एनओसी प्राप्त की है, जबकि 17 केंद्रों के पास यह सुविधा नहीं है।
शहरी स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक
अग्नि सुरक्षा के मामले में सबसे खराब स्थिति शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) की सामने आई है। जिले के सभी 8 यूपीएचसी बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा एक सैटेलाइट अस्पताल, एक यूसीएचसी तथा अन्य श्रेणी के कुछ स्वास्थ्य संस्थानों के पास भी फायर सुरक्षा प्रमाणन उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन पाइपलाइन, बिजली उपकरण, दवाइयों का भंडारण और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग लगने का जोखिम सामान्य भवनों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में फायर एनओसी का अभाव किसी बड़े खतरे का संकेत माना जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है फायर एनओसी?
फायर एनओसी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि किसी अस्पताल या भवन में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं। देशभर में अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें मरीजों की जान तक चली गई। विशेषज्ञों के अनुसार फायर एनओसी के साथ-साथ नियमित फायर ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव, मॉक ड्रिल और कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी अनिवार्य होना चाहिए। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाती है तो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
32 सरकारी संस्थानों ने पहली बार किया आवेदन
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 32 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों ने पहली बार फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है। इनमें 19 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और एक सैटेलाइट अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इन संस्थानों को भी आवश्यक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आवेदन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपायों को धरातल पर लागू करना भी उतना ही जरूरी है।
निजी अस्पतालों में भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं हालात
अलवर जिले के निजी अस्पतालों की स्थिति सरकारी संस्थानों की तुलना में बेहतर जरूर है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती। जिले के 128 निजी अस्पतालों में से 104 के पास फायर एनओसी है, जबकि 24 अस्पताल अब भी बिना एनओसी संचालित हो रहे हैं। इनमें 22 अस्पतालों ने पहली बार आवेदन किया है और एक अस्पताल ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 200 बेड क्षमता वाला एक बड़ा निजी अस्पताल भी बिना फायर एनओसी संचालित हो रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।