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रूस पर ईयू का नया शिकंजा, भारत समेत कई देशों की कंपनियां भी रडार पर

रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ (EU) 21वें प्रतिबंध पैकेज की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित कार्रवाई के तहत भारत, चीन, तुर्किये और अन्य देशों की करीब 50 कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण संबंधी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। यूरोपीय संघ का आरोप है कि ये कंपनियां रूस के सैन्य और औद्योगिक तंत्र को अप्रत्यक्ष सहायता पहुंचा रही हैं।

भारत समेत कई देशों की कंपनियां निशाने पर

यूरोपीय संघ के प्रस्तावित प्रतिबंध पैकेज में भारत, चीन, तुर्किये, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात की कंपनियों को शामिल किया गया है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि ये संस्थाएं रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रही हैं। हालांकि, इस पैकेज को लागू करने से पहले सभी सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होगी।

रूसी ऊर्जा कारोबार पर भी बढ़ेगा दबाव

ईयू इस बार रूस के तेल और एलएनजी कारोबार पर भी कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। प्रतिबंधित जहाजों की सूची में नए पोत जोड़े जाएंगे और रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को सहयोग देने वाली सेवाओं पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा तेल व्यापार से जुड़े बंदरगाहों, रिफाइनरियों और अन्य संस्थानों को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की योजना है।

भारत पर पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूसी कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में यदि नए प्रतिबंध लागू होते हैं तो रूसी तेल की आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने और भारत के आयात पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क पर भी नजर

प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, तेल व्यापारियों, हथियार निर्माताओं और क्रिप्टोकरेंसी ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिन पर रूस को आर्थिक सहायता पहुंचाने का आरोप है। यूरोपीय संघ का उद्देश्य रूस के राजस्व स्रोतों को सीमित करना और मौजूदा प्रतिबंधों को अधिक प्रभावी बनाना है।

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