E20 पेट्रोल पर ARAI रिपोर्ट के बड़े संकेत, माइलेज घटने और रबर पार्ट्स पर असर की आशंका
देश में E20 पेट्रोल के विस्तार को लेकर बहस के बीच ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, E10 ईंधन के लिए तैयार किए गए कुछ वाहनों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं और माइलेज में भी 2 से 6 प्रतिशत तक कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सभी वाहनों पर इसका प्रभाव समान नहीं है और कई मामलों में प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया।
E10 वाहनों में रबर पार्ट्स पर असर की आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, जिन वाहनों को E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के अनुरूप डिजाइन किया गया है, उनमें E20 पेट्रोल का उपयोग करने से फ्यूल सिस्टम के रबर से बने हिस्सों जैसे होज, गैस्केट, सील और O-रिंग पर असर पड़ सकता है। अध्ययन में संकेत दिया गया कि लंबे समय तक उपयोग की स्थिति में इन पुर्जों को बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि यह निष्कर्ष विशेष परीक्षणों पर आधारित है और सभी मॉडलों पर समान रूप से लागू नहीं माना गया है।
कुछ इंजनों में प्रदर्शन सामान्य, कुछ में तकनीकी समस्या
स्टडी में विभिन्न चार पहिया वाहनों के इंजनों का परीक्षण किया गया। एक निर्माता के इंजन ने E20 ईंधन के साथ लंबी अवधि तक संतोषजनक प्रदर्शन किया, जबकि दूसरे निर्माता के BS-VI टर्बोचार्ज्ड इंजन में परीक्षण के दौरान एग्जॉस्ट वाल्व से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, यह समस्या थर्मोमैकेनिकल फेल्योर से जुड़ी थी, जिसमें अत्यधिक गर्मी और लगातार यांत्रिक दबाव के कारण इंजन के वाल्व प्रभावित हो सकते हैं।
क्या होता है थर्मोमैकेनिकल फेल्योर?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, थर्मोमैकेनिकल फेल्योर वह स्थिति होती है जब इंजन के किसी हिस्से पर लगातार अधिक तापमान और यांत्रिक दबाव पड़ने से उसमें दरार, विकृति या टूट-फूट होने लगती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी समस्या केवल ईंधन के कारण ही नहीं, बल्कि इंजन डिजाइन, रखरखाव और अन्य तकनीकी कारणों से भी हो सकती है।
दोपहिया वाहनों में नहीं मिली बड़ी समस्या
रिपोर्ट में तीन प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माताओं के परीक्षणों का भी उल्लेख किया गया है। इन परीक्षणों में E20 ईंधन के उपयोग से कोई गंभीर तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई। इसके अलावा अध्ययन में यह भी पाया गया कि परीक्षण किए गए वाहनों के धातु वाले हिस्सों पर E20 का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा और उत्सर्जन (एमिशन) निर्धारित कानूनी मानकों के भीतर ही रहा।
माइलेज पर पड़ सकता है असर
अध्ययन में यह भी सामने आया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से ईंधन की खपत E10 की तुलना में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसका सीधा मतलब यह है कि कुछ वाहनों का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन के मॉडल, इंजन तकनीक और ड्राइविंग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
चरणबद्ध लागू करने की थी सिफारिश
रिपोर्ट के अनुसार, E20 पेट्रोल को लागू करने के लिए चरणबद्ध रणनीति अपनाने की सलाह दी गई थी, ताकि पुराने और नए वाहनों के बीच तकनीकी अनुकूलता सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन वाहनों को विशेष रूप से E20 के लिए तैयार किया गया है, उनमें इस ईंधन का उपयोग अपेक्षाकृत सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।