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जयपुर में वकीलों का उग्र आंदोलन, सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम; राजस्व कोर्ट और रजिस्ट्रियों पर असर

जयपुर में राजस्व न्यायालयों और पंजीयन व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर वकीलों का आंदोलन तेज हो गया है। गुरुवार को वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो राजस्व न्यायालयों का कार्य बहिष्कार जारी रहेगा और उप पंजीयक कार्यालयों में रजिस्ट्रियों का काम भी पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन, कई कार्यालयों का काम प्रभावित

‘दी डिस्ट्रिक्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जयपुर’ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर के प्रवेश द्वारों पर विरोध दर्ज कराया तथा राजस्व न्यायालयों के बाहर भी नारेबाजी की। इसके बाद अधिवक्ताओं ने जिला न्यायालय और संभागीय आयुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में कामकाज प्रभावित रहा और आम लोगों को भी विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

इन मांगों को लेकर जारी है आंदोलन

बार एसोसिएशन का कहना है कि राजस्व मंडल जयपुर की बेंच को स्थानांतरित करने, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (चतुर्थ) न्यायालय को चौमूं भेजने, सांगानेर एसडीएम से जुड़े मामलों के स्थानांतरण, उप पंजीयक कार्यालयों में स्लॉट व्यवस्था और पंजीयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से विरोध चल रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि 30 जून से राजस्व न्यायालयों का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

48 घंटे में समाधान नहीं हुआ तो रजिस्ट्रियां भी रहेंगी बंद

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार को 48 घंटे का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जयपुर जिले के सभी राजस्व न्यायालयों में कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। इसके साथ ही सभी उप पंजीयक कार्यालयों में संपत्ति रजिस्ट्रेशन का कार्य भी बंद रखा जाएगा। इससे भूमि खरीद-बिक्री और पंजीयन से जुड़े हजारों मामलों पर सीधा असर पड़ सकता है।

सरकार को कई स्तरों पर सौंपे जा चुके हैं ज्ञापन

अधिवक्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री, राजस्व मंडल, महानिरीक्षक मुद्रांक, अतिरिक्त मुख्य सचिव, शासन सचिव और जिला प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों को पहले ही ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। उनका आरोप है कि बार-बार मांग रखने के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर समाधान नहीं निकला। वकीलों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा प्रदेश स्तर पर आगे की रणनीति भी तैयार की जाएगी।

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