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उदयपुर में डॉक्टरों पर हमला: IMA प्रदेश अध्यक्ष से मारपीट के बाद भड़का चिकित्सक समाज, पुलिस को दिया 5 दिन का अल्टीमेटम

उदयपुर के एक निजी अस्पताल में मरीज के उपचार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गया है। अस्पताल में हंगामे के दौरान डॉक्टरों के साथ मारपीट और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता के साथ कथित अभद्रता के बाद प्रदेशभर के चिकित्सकों में भारी आक्रोश है। डॉक्टरों ने सुरक्षा और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रशासन को पांच दिन का समय दिया है। पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

इलाज को लेकर विवाद, अस्पताल में मचा हंगामा

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को उदयपुर के एक निजी ऑर्थोपेडिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि बाइक दुर्घटना में घायल मरीज के दोनों हाथों में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उसका ऑपरेशन किया गया। उपचार के दौरान मरीज की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इसी बात को लेकर अस्पताल परिसर में तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया। हालात ऐसे बन गए कि अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

समझाइश करने पहुंचे IMA अध्यक्ष भी बने विवाद का हिस्सा

स्थिति को शांत कराने और परिजनों को समझाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई तथा उनके कपड़े फाड़ दिए गए। इस घटना ने चिकित्सक समुदाय को झकझोर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि चिकित्सा सेवा देने वाले लोगों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे अस्पतालों में भय का वातावरण बन रहा है। घटना के बाद प्रदेशभर के चिकित्सकों ने एकजुट होकर कड़ी नाराजगी जताई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई।

पुलिस ने बनाई एसआईटी, कई आरोपी हिरासत में

घटना के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। इस टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो पूरे घटनाक्रम की जांच करेंगे। पुलिस ने मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप में कई लोगों को हिरासत में लिया है तथा सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। दूसरी ओर मरीज के परिजनों ने भी अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे में पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच करने का दावा कर रही है।

डॉक्टरों ने दी आंदोलन की चेतावनी

एसपी से मुलाकात के बाद चिकित्सक संगठनों ने फिलहाल कार्य बहिष्कार को स्थगित कर दिया है और पुलिस को पांच दिन का समय दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि तय समय के भीतर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। चिकित्सकों ने स्पष्ट कहा है कि अस्पतालों में भयमुक्त माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि डॉक्टर बिना किसी दबाव और डर के मरीजों का उपचार कर सकें। फिलहाल पूरे मामले पर चिकित्सा जगत और प्रशासन की नजर बनी हुई है।

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