कर्नाटक में नया राजनीतिक अध्याय: डीके शिवकुमार ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, कांग्रेस ने किया बड़ा फेरबदल
खबर का संक्षिप्त सारांश (इंट्रो)
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ डॉ. जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस अवसर पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नई सरकार में कुल 12 मंत्रियों को भी शामिल किया गया है, जिससे राज्य में कांग्रेस ने नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत की है।
डीके शिवकुमार बने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री
बेंगलुरु के भव्य समारोह में कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। उन्होंने संविधान को हाथ में लेकर पद की जिम्मेदारी स्वीकार की। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें औपचारिक रूप से शपथ दिलाई। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। डीके शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में थे और अब उनका यह राजनीतिक लक्ष्य पूरा हो गया है। यह शपथ ग्रहण कर्नाटक की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
जी परमेश्वर बने उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल का विस्तार
नई सरकार में डॉ. जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके साथ 12 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें अनुभवी और युवा दोनों नेता शामिल हैं। केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगारेड्डी, सतीश जराकिहोली, प्रियांक खड़गे जैसे प्रमुख नाम भी मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं। यतींद्र सिद्धारमैया जैसे युवा नेताओं को भी कैबिनेट में जगह देकर कांग्रेस ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार में अनुभव और नई सोच दोनों का मिश्रण देखने को मिलेगा।
राजनीतिक संतुलन और कांग्रेस की रणनीति
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के साथ कांग्रेस ने संगठनात्मक संतुलन की रणनीति अपनाई है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को CWC में शामिल कर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि सभी नेताओं को सम्मानजनक भूमिका दी जाएगी। इससे पार्टी के भीतर किसी भी तरह की नाराजगी को रोकने की कोशिश की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों खेमों के बीच संतुलन बनाकर कांग्रेस ने राज्य में स्थिर सरकार देने की रणनीति तैयार की है। यह कदम आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।