क्रूड ऑयल सस्ता, फिर भी डीजल पर बढ़ी Export Duty, जानिए वजह
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब क्रूड सस्ता हो रहा है तो ड्यूटी क्यों बढ़ाई गई और इसका घरेलू ईंधन कीमतों पर क्या असर पड़ेगा
US-ईरान समझौते के बाद गिरे कच्चे तेल के दाम
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में लगातार नरमी देखी गई है। दो सप्ताह पहले जहां कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, वहीं अब कीमतें 80 डॉलर के आसपास आ गई हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता भी कुछ हद तक कम हुई है।
सरकार ने डीजल और ATF पर बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी
वित्त मंत्रालय ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 13.5 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दी है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर यह ड्यूटी 9.5 रुपये से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। नई दरें मंगलवार से लागू हो गई हैं। हालांकि पेट्रोल पर किसी तरह की अतिरिक्त एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई है, जिससे पेट्रोल उपभोक्ताओं पर फिलहाल सीधा असर नहीं पड़ेगा।
आखिर ड्यूटी बढ़ाने की क्या है वजह?
स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) की गणना मौजूदा कीमतों के आधार पर नहीं, बल्कि पिछले दो सप्ताह की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर की जाती है। बीते दिनों कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर थीं, इसलिए उसी औसत को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी बढ़ाई गई है। यानी मौजूदा गिरावट का असर अगली समीक्षा में दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि क्रूड सस्ता होने के बावजूद ड्यूटी में वृद्धि की गई है।
2022 में शुरू हुई थी यह व्यवस्था
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 2022 में पहली बार इस विशेष ड्यूटी व्यवस्था को लागू किया गया था। बाद में 2024 में इसे समाप्त कर दिया गया, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस वर्ष मार्च में इसे फिर से लागू करना पड़ा। शुरुआती दौर में डीजल और ATF पर ड्यूटी काफी अधिक थी, जिसे बाद में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया जाता रहा है।
घरेलू बाजार में क्या है पेट्रोल-डीजल की स्थिति?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें भिन्न होने के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी अंतर देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य बनी रहती है और तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले समय में एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी राहत मिल सकती है।