फर्जी डिग्री मामले में विधायक जयदीप बिहाणी पर शिकंजा, कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट के दिए आदेश
राजस्थान के चर्चित फर्जी डिग्री प्रकरण में श्रीगंगानगर की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए विधायक जयदीप बिहाणी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने एक वर्ष से अधिक समय तक समन और जमानती वारंट की प्रभावी तामील नहीं होने पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी और आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाना आवश्यक है।
एक साल बाद भी पेश नहीं हुए आरोपी, कोर्ट ने जताई नाराजगी
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-2) श्रीगंगानगर की अदालत में चल रहे इस मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपियों को कई बार समन और जमानती वारंट जारी किए जाने के बावजूद वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। अदालत ने माना कि तामील प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई और आरोपियों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए। न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों का पालन समय पर नहीं होगा तो न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। इसी आधार पर अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।
एसपी और आईजी को दिए कड़े निर्देश, मांगा जवाब
अदालत ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए प्रतिदिन प्रयास किए जाएं और हर कार्रवाई का रिकॉर्ड रोजनामचे में दर्ज किया जाए। अगली सुनवाई के दौरान यह रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत करना होगा। यदि आदेशों का पालन नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी को स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। इसके अलावा बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को भी आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
किस मामले में घिरे हैं विधायक जयदीप बिहाणी?
यह मामला बिहाणी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (BIFT) से कथित रूप से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं जारी किए जाने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संस्थान ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और नियामक संस्थाओं से मान्यता प्राप्त होने का दावा करते हुए विद्यार्थियों से फीस वसूली, जबकि बाद में जानकारी मिली कि संबंधित विश्वविद्यालय उन पाठ्यक्रमों का संचालन ही नहीं करता था। इस मामले में संस्थान से जुड़े कई पदाधिकारियों और प्रबंधन से जुड़े लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
2015 की एफआईआर से शुरू हुआ मामला, अब जांच निर्णायक मोड़ पर
इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2015 में न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि छात्रों को मान्यता प्राप्त डिग्री देने का भरोसा दिलाकर उनसे लाखों रुपये की फीस ली गई। बाद में दस्तावेजों की जांच में कथित अनियमितताओं की बात सामने आई। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और अदालत ने विभिन्न धाराओं के तहत आरोपों का संज्ञान लिया। अब गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है और अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है, जहां अदालत पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की स्थिति की समीक्षा करेगी।