CJP का सख्त संदेश: ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं तो बातचीत का मतलब नहीं’
केंद्र सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित तीसरे दौर की बातचीत से पहले संगठन ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है। CJP का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी प्रमुख मांग है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा। साथ ही संगठन ने अन्य मांगों पर सरकार से लिखित आश्वासन देने की भी मांग की है। अब सभी की नजर तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी है।
तीसरे दौर की बैठक से पहले सख्त रुख
तीसरे दौर की प्रस्तावित बातचीत से कुछ घंटे पहले CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संगठन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP की सबसे अहम मांग है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। रांका के मुताबिक, यदि सरकार इस मांग को अस्वीकार करती है, तो आगे की बातचीत का कोई औचित्य नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर लंबी चर्चा के बजाय सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है।
‘हां या ना में जवाब दे सरकार’
आशुतोष रांका ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर सरकार को केवल स्पष्ट निर्णय देना चाहिए। उनके अनुसार, इस मांग पर अनिश्चितता या लंबी बातचीत की आवश्यकता नहीं है। CJP का कहना है कि वह अपनी प्रमुख मांग पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा और सरकार को अपना रुख साफ करना होगा। संगठन का दावा है कि अब वार्ता का अगला चरण इसी जवाब पर निर्भर करेगा।
अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग
CJP ने यह भी कहा है कि जिन मांगों पर सरकार ने सिद्धांत रूप से सकारात्मक संकेत दिए हैं, उन्हें लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। संगठन ने प्रदर्शन से प्रभावित परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने और आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगा है। CJP का कहना है कि यदि इन बिंदुओं पर लिखित सहमति मिलती है, तो उन्हें पूरा हुआ माना जा सकता है। हालांकि, संगठन ने दोहराया कि उसकी प्राथमिक मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की ही है।
दूसरे दौर की बैठक में क्या हुआ था?
शुक्रवार को संविधान क्लब में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों के साथ दूसरे दौर की बातचीत की थी। बैठक के बाद सरकार की ओर से कहा गया था कि सभी मांगों पर विचार किया जाएगा और तीसरे दौर की बैठक में अपना पक्ष रखा जाएगा। प्रस्तावित तीसरी बैठक दोपहर बाद आयोजित होने की संभावना जताई गई है, हालांकि बैठक स्थल को लेकर अंतिम जानकारी सामने नहीं आई थी।
तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी निगाहें
CJP ने संकेत दिया है कि यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग स्वीकार नहीं करती, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। दूसरी ओर, सरकार और संगठन के बीच जारी संवाद को देखते हुए यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि दोनों पक्ष किसी साझा सहमति तक पहुंचते हैं या फिर आंदोलन और राजनीतिक टकराव आगे बढ़ता है।