दिल्ली दंगा साजिश केस: उमर खालिद और शरजील इमाम ने फिर मांगी जमानत, पुलिस से मांगा जवाब
2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम ने एक बार फिर अदालत में नियमित जमानत याचिका दायर की है। कड़कड़डूमा अदालत ने दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है और मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।
जमानत याचिका पर अदालत का संज्ञान
दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में दायर नई जमानत याचिकाओं पर वेकेशन जज ने प्रारंभिक सुनवाई की। अदालत ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत का यह कदम मामले की आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों आरोपियों की ओर से यह दलील दी गई है कि वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और मुकदमे की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
लंबी हिरासत और सुनवाई में देरी बना आधार
जमानत याचिका में मुख्य रूप से लंबी अवधि की हिरासत और मुकदमे में हो रही देरी का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वर्षों से जेल में रहने के बावजूद अभी तक मामले में अंतिम सुनवाई की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। आरोप तय करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में बिना दोष सिद्ध हुए लंबे समय तक हिरासत में रखा जाना न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद नई पहल
हाल ही में उच्चतम न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान कुछ कानूनी पहलुओं पर चर्चा के बाद दोनों आरोपियों ने निचली अदालत में नई जमानत याचिकाएं दाखिल करने का फैसला किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद बचाव पक्ष को नए आधारों पर राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत तथ्यों और पुलिस के जवाब पर निर्भर करेगा।
एफआईआर-59 से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एफआईआर-59/2020 से संबंधित है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा के पीछे एक संगठित साजिश थी। इसी आधार पर कई आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं और यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है।
कई चर्चित नाम हैं आरोपियों की सूची में
इस हाई-प्रोफाइल मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम के अलावा कई छात्र नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक रूप से चर्चित व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, इशरत जहां, गुलफिशा फातिमा, सफूरा जरगर, नताशा नरवाल और अन्य नाम शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई अलग-अलग चरणों में चल रही है और अदालत में आरोपों की वैधानिक जांच जारी है।