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सम्मान निधि भुगतान में देरी से किसानों की बढ़ी चिंता, विपक्ष ने उठाए सवाल

राजस्थान में किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर महंगाई, कर्ज और बेमौसम बारिश ने खेती को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत भुगतान में देरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

किसानों पर दोहरी मार: मौसम और आर्थिक दबाव

प्रदेश के किसान इस समय कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। बेमौसम बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हुई है। इसके साथ ही खेती की लागत में बढ़ोतरी और महंगाई ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। कई किसान पहले से कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, ऐसे में आय के सीमित स्रोत और अनिश्चित मौसम ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इन परिस्थितियों में सरकारी सहायता योजनाओं का समय पर मिलना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

सम्मान निधि भुगतान रुका, बढ़ी परेशानी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन हाल के दिनों में इसके भुगतान में देरी या रुकावट की शिकायतें सामने आ रही हैं। सीकर, अलवर सहित कई जिलों के किसानों को समय पर राशि नहीं मिल पाने से वे परेशान हैं। यह राशि किसानों के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होती है। भुगतान में देरी से उनकी खेती की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है, जिससे आने वाले सीजन पर भी खतरा मंडरा सकता है।

विपक्ष का सरकार पर हमला

विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब किसान पहले से ही संकट में हैं, तब इस तरह की लापरवाही उनकी स्थिति को और गंभीर बना रही है। जूली ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलना उनका अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।

समाधान की मांग और उम्मीदें

किसानों और जनप्रतिनिधियों की ओर से सरकार से जल्द समाधान की मांग की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर भुगतान बहाल नहीं किया गया, तो इसका असर न केवल किसानों की आजीविका पर पड़ेगा, बल्कि कृषि उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित विभाग तुरंत स्थिति का आकलन कर भुगतान प्रक्रिया को सुचारु बनाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और वे अपनी खेती को बिना किसी बाधा के जारी रख सकें।

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