‘कांग्रेस अब जेब में नहीं रही’, अशोक गहलोत पर पूर्व OSD लोकेश शर्मा का बड़ा हमला
राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। इस बार उनके पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने खुलकर मोर्चा खोलते हुए गहलोत के हालिया बयानों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ी घटनाओं और 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शर्मा ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयान ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की इच्छा नहीं थी: लोकेश शर्मा
लोकेश शर्मा ने दावा किया कि जब कांग्रेस नेतृत्व अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर रहा था, तब गहलोत स्वयं इस जिम्मेदारी को लेने के इच्छुक नहीं थे। शर्मा के अनुसार गहलोत को दिल्ली की राजनीति और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर असहजता थी। उन्होंने कहा कि गहलोत की प्राथमिकता राजस्थान की राजनीति और मुख्यमंत्री पद पर बने रहना था। शर्मा का आरोप है कि राष्ट्रीय स्तर की भूमिका स्वीकार करने के बजाय उन्होंने राज्य की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने को अधिक महत्व दिया।
मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर थी चिंता
पूर्व ओएसडी ने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद संभावित राजनीतिक और प्रशासनिक समीक्षाओं की चिंता थी। शर्मा के मुताबिक, उन्हें आशंका थी कि यदि राज्य में नया नेतृत्व स्थापित हुआ तो उनके कार्यकाल के कई फैसलों की समीक्षा हो सकती है। इसी वजह से वे दिल्ली की राजनीति में जाने के प्रति उत्साहित नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह पूरी स्थिति किसी साजिश का परिणाम नहीं बल्कि गहलोत की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का हिस्सा थी।
25 सितंबर 2022 की घटना पर उठाए सवाल
लोकेश शर्मा ने सितंबर 2022 के उस चर्चित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया, जब कांग्रेस नेतृत्व की ओर से पर्यवेक्षक जयपुर पहुंचे थे। शर्मा का कहना है कि उस समय विधायकों की बैठक और सामूहिक इस्तीफों की रणनीति हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश थी। उनके अनुसार यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि राज्य में बड़ी संख्या में विधायक गहलोत के समर्थन में खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच दूरी बढ़ाने का काम किया।
हाईकमान को लेकर बयान पर जताई नाराजगी
शर्मा ने गहलोत द्वारा कथित तौर पर ‘साजिश’ शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास में शायद ही किसी वरिष्ठ नेता ने पार्टी नेतृत्व या शीर्ष नेतृत्व पर इस तरह सीधे सवाल उठाए हों। उनके मुताबिक, ऐसे बयान पार्टी संगठन को कमजोर करने वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई नेता अपनी जनाधार आधारित ताकत को लेकर आश्वस्त है, तो उसे जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक स्थिति साबित करनी चाहिए।
राजस्थान कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
लोकेश शर्मा के बयानों से यह साफ संकेत मिलता है कि राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी और राजनीतिक मतभेद अभी भी समाप्त नहीं हुए हैं। एक ओर अशोक गहलोत अपने राजनीतिक अनुभव और प्रभाव के साथ सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर कुछ नेता उनके नेतृत्व और रणनीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को और प्रभावित कर सकता है।