CJP का सरकार पर नया हमला: ’34 दिन बाद बोले पीएम, शिक्षा मंत्री पर अब भी कार्रवाई नहीं’
NEET-UG 2026 और कथित पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। इस पर CJP (Cockroach Janata Party) ने बातचीत के लिए दो शर्तें रखी हैं। वहीं, संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में 34 दिन लग गए, जबकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
34 दिन बाद आई प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर उठाए सवाल
NEET-UG 2026 और कथित पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया आने में 34 दिन लग गए। उनका आरोप है कि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश कर रही है। दीपके ने कहा कि छात्रों का आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को लेकर जारी है।
सरकार ने बातचीत का दिया प्रस्ताव
छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार की ओर से संवाद की पहल भी की गई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की इच्छा जताई। सरकार की ओर से कहा गया कि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी उपयुक्त स्थान पर आकर चर्चा कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि संवाद के जरिए छात्रों की चिंताओं को समझने और समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल को आंदोलन के बीच सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि प्रदर्शनकारी संगठन ने इस पर अपनी शर्तें भी रख दी हैं।
CJP ने बातचीत के लिए रखीं दो प्रमुख शर्तें
सरकार के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि संगठन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह केवल औपचारिक बैठक नहीं होनी चाहिए। पहली शर्त के अनुसार बैठक जंतर-मंतर या दोनों पक्षों की सहमति वाले किसी तटस्थ स्थान पर आयोजित की जाए। दूसरी शर्त यह रखी गई कि वार्ता के बाद सरकार छात्रों की मांगों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। संगठन का कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा, बल्कि निर्णय और क्रियान्वयन भी आवश्यक है।
विपक्ष ने भी सरकार से मांगे जवाब
छात्र आंदोलन के बीच विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार को पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, घायल छात्रों, इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध और अन्य प्रशासनिक कदमों पर भी सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की चिंताओं का समाधान संवाद और पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से होना चाहिए।
आंदोलन के बीच संवाद और समाधान पर नजर
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की व्यापक मांग का रूप ले चुका है। एक ओर सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की बात कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी संगठन अपनी शर्तों के साथ वार्ता को परिणाम आधारित बनाने की मांग कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है या आंदोलन का स्वरूप और व्यापक होता है।