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वोटर लिस्ट से नाम हटने पर नहीं जाएगी नागरिकता, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकार किए स्पष्ट

वोटर लिस्ट से नाम हटने पर नहीं जाएगी नागरिकता: SC

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। वोटर लिस्ट में नाम होना या हटना अपने आप में नागरिकता का प्रमाण या समाप्ति का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का काम मतदाता सूची का प्रबंधन करना है, जबकि नागरिकता से जुड़े फैसले संबंधित सरकारी प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक या गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार नहीं रखता। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची तैयार करने, उसमें सुधार करने और चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने तक सीमित है। नागरिकता से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकरण के पास है।

वोटर लिस्ट से नाम हटना नागरिकता खत्म होने का आधार नहीं

अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकता और मतदाता सूची दो अलग-अलग कानूनी विषय हैं। किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटने के बाद भी उसकी नागरिकता पर स्वतः कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

संदिग्ध नागरिकता मामलों में प्रक्रिया का पालन जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर कोई विवाद सामने आता है तो कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि किसी ट्रिब्यूनल या अन्य संस्था की ओर से कोई स्थिति सामने आती है तो चुनाव आयोग खुद नागरिकता पर फैसला नहीं ले सकता, बल्कि मामला संबंधित मंत्रालय के पास भेजा जाना चाहिए।

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राशन और सरकारी योजनाओं से वंचित करने पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन आरोपों पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया था कि कुछ लोगों को मतदाता सूची में नाम नहीं होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से दूर किया जा रहा है।

बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता: अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के आधार पर किसी व्यक्ति को सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस मुद्दे को मानवीय और जनहित से जुड़ा विषय मानते हुए आगे सुनवाई करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा कि नागरिक अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है।

25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है। अब अदालत में नागरिकता, मतदाता सूची और सरकारी योजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद नागरिकता निर्धारण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कानूनी स्थिति और स्पष्ट हुई है।

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