धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से पूछा- ‘हिचकिचाहट क्यों?’
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विरोध के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार से सवाल किया कि यदि जवाबदेही तय करनी है तो शिक्षा मंत्री को हटाने में देरी क्यों की जा रही है। इस बीच विपक्ष के कई नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार पर साधा निशाना
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री को हटाना सरकार के लिए उचित कदम होगा। उन्होंने लिखा कि यदि सरकार राजनीतिक श्रेय को लेकर चिंतित है, तो किसी भी फैसले का श्रेय देश के छात्रों को मिलना चाहिए, जिन्होंने अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जवाबदेही तय करने से बचना और असंतोष को बढ़ने देना किसी सरकार के हित में नहीं है।
जंतर-मंतर पर जारी है छात्रों का आंदोलन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है। आंदोलन के दौरान विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। इस विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को भी तेज कर दिया है।
सोनम वांगचुक के शामिल होने से बढ़ी चर्चा
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। उनके आंदोलन को लेकर कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर समर्थन व्यक्त किया। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर अपनी बात रखी। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत सहित कई अन्य नेताओं ने भी छात्रों की मांगों पर सरकार से संवाद शुरू करने की अपील की।
विपक्ष ने सरकार से बातचीत की मांग की
विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्रों और आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि संवाद के जरिए समाधान निकालना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।
राजनीतिक बहस के केंद्र में शिक्षा का मुद्दा
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच शिक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और छात्रों की मांगें राष्ट्रीय राजनीति का अहम विषय बन गई हैं। विपक्ष सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक निर्णय और प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।