चित्तौड़गढ़: मां के निधन के 9वें दिन बेटे की भी मौत, मौसर से पहले उठी दूसरी अर्थी
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रोड जी का खेड़ा गांव में मां और बेटे के रिश्ते से जुड़ी एक भावुक घटना सामने आई है। 92 वर्षीय प्यारी बाई के निधन के महज नौ दिन बाद उनके 60 वर्षीय सबसे छोटे बेटे भेरुशंकर की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, मां के निधन के बाद से ही बेटा गहरे सदमे में था। इसी बीच उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार में मां के मौसर की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इससे पहले ही दूसरी अर्थी उठ गई।
मां के निधन के बाद गहरे सदमे में था बेटा
चित्तौड़गढ़ जिले के रोड जी का खेड़ा गांव में रहने वाले 60 वर्षीय भेरुशंकर अपनी मां प्यारी बाई से बेहद लगाव रखते थे। 92 वर्ष की उम्र में मां के निधन के बाद से वह काफी दुखी थे।परिजनों के मुताबिक, मां को खोने का गम उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। परिवार के सदस्य उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, मां से बिछड़ने का दुख उनके लिए गहरा आघात बन गया।मां और बेटे के बीच इस भावनात्मक जुड़ाव की चर्चा अब पूरे गांव में हो रही है। परिवार के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक बन गई है।
मौसर की तैयारियों के बीच बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, प्यारी बाई का निधन 12 अक्टूबर को हुआ था। इसके बाद परिवार में मौसर की तैयारियां की जा रही थीं।इसी दौरान भेरुशंकर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।भेरुशंकर की मौत से परिवार को एक और बड़ा झटका लगा। मां के निधन का शोक अभी जारी था। इसी बीच बेटे की मौत की खबर ने परिजनों को तोड़कर रख दिया।हालांकि, बेटे की मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे केवल मां के वियोग या सदमे से हुई मौत कहना उचित नहीं होगा।
नौ दिन में उठीं दो अर्थियां, गांव में शोक
मां के निधन के महज नौ दिन बाद बेटे की मौत से गांव में शोक का माहौल है। जिस घर में प्यारी बाई के निधन के बाद मातम पसरा था, वहां अब दूसरी अर्थी उठने से हर आंख नम हो गई।परिवार में मौसर की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन इससे पहले ही भेरुशंकर की मौत हो गई। इस घटना ने परिजनों की पीड़ा और बढ़ा दी।ग्रामीणों के लिए भी यह घटना भावुक कर देने वाली है। मां और बेटे के रिश्ते की गहराई को लेकर लोग अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
मां-बेटे के रिश्ते की भावुक कहानी
मां और बेटे का रिश्ता जीवन के सबसे गहरे भावनात्मक रिश्तों में गिना जाता है। उम्र बढ़ने के साथ भी माता-पिता से जुड़ाव कम नहीं होता।रोड जी का खेड़ा की यह घटना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। पहले मां और फिर कुछ ही दिनों बाद बेटे का चले जाना दुखद संयोग बन गया।परिजनों के मुताबिक, भेरुशंकर मां के निधन के बाद से ही दुखी थे। हालांकि, उनकी मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि चिकित्सकीय जानकारी से ही हो सकती है।फिलहाल, गांव में शोक का माहौल है। एक ही परिवार में नौ दिन के भीतर दो मौतों ने सभी को भावुक कर दिया है।