बूंदी न्यूज: महाराष्ट्र से हाड़ौती आएंगी दो बाघिनें, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी में बढ़ेगा कुनबा
राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए वन विभाग ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी की है। मध्यप्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन राजस्थान लाई जाएगी। इन्हें मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसाने की योजना है। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वन विभाग को उम्मीद है कि दीपावली के बाद बाघिनें हाड़ौती के जंगलों में पहुंच सकती हैं। इस पहल का उद्देश्य बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना भी है।
महाराष्ट्र से आएंगी दो बाघिनें
हाड़ौती के जंगलों में बाघों का कुनबा बढ़ाने की योजना अब अगले चरण में पहुंच रही है। इसके तहत महाराष्ट्र के दो प्रमुख टाइगर रिजर्व से बाघिनों को राजस्थान लाने की तैयारी है। ताड़ोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से एक और पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन लाई जाएगी।योजना के अनुसार, इन बाघिनों को मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा। हालांकि, इसके लिए दोनों राज्यों के संबंधित अधिकारियों की स्वीकृति जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद बाघिनों का चयन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका स्थानांतरण होगा।वन विभाग को उम्मीद है कि दीपावली के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इससे राजस्थान में बाघ संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है।
पांच बाघिनों को लाने की योजना पर काम
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में दूसरे राज्यों से कुल पांच बाघिनें लाने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य बाघों की आबादी बढ़ाना और उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।योजना के पहले चरण में मध्यप्रदेश के पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन लाई जा चुकी है। अब दूसरे चरण में महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिनें लाने की तैयारी है।इसके बाद अंतिम चरण में मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और बाघिन को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की योजना है। इस तरह निर्धारित योजना पूरी होने पर दोनों टाइगर रिजर्व में पांच बाघिनें दूसरे राज्यों से लाई जाएंगी।
मुकुंदरा और रामगढ़ में बाघों की आबादी बढ़ने की उम्मीद
मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व राजस्थान में बाघ संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यहां बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों से बाघिनें लाने की योजना पर काम किया जा रहा है।वन विभाग के अनुसार, पहले चरण में मध्यप्रदेश से लाई गई दोनों बाघिनें यहां के वातावरण के अनुरूप ढल चुकी हैं। उन्होंने अपनी टेरेटरी भी बनानी शुरू कर दी है। इससे अधिकारियों को आगे की योजना के सफल होने की उम्मीद मिली है।महाराष्ट्र से आने वाली बाघिनों को भी नए वातावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनके व्यवहार, गतिविधियों और क्षेत्र विस्तार की निगरानी की जाएगी। हालांकि, नए क्षेत्र में उनका अनुकूलन और आगे प्रजनन की सफलता कई प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर में रखा जाएगा
बाघिनों को नए जंगल में सुरक्षित तरीके से बसाने के लिए दोनों टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य बाघिनों को नए वातावरण से परिचित होने के लिए समय देना है।स्थानांतरण के बाद बाघिनों को कुछ समय तक इन एनक्लोजर में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी स्थिति और आसपास के वातावरण के प्रति प्रतिक्रिया पर नजर रखी जाएगी। परिस्थितियां अनुकूल होने पर उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।बाघिनों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे वन विभाग को उनकी लोकेशन, गतिविधियों और टेरेटरी बनाने की प्रक्रिया की जानकारी मिल सकेगी।पिछले चरण में मध्यप्रदेश से बाघिनों को अधिक दूरी के कारण हेलीकॉप्टर से लाया गया था। इस बार परिवहन का तरीका और अन्य व्यवस्थाएं संबंधित अधिकारियों की मंजूरी तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तय होंगी।
बाघों के जीन पूल में विविधता बढ़ाने पर जोर
इस अभियान का उद्देश्य केवल बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं है। वन विभाग की योजना बाघों के जीन पूल को मजबूत करने की भी है। अलग-अलग क्षेत्रों से बाघिनें आने पर भविष्य में प्रजनन के जरिए आनुवंशिक विविधता बढ़ने की संभावना रहती है।आनुवंशिक विविधता वन्यजीवों की दीर्घकालीन आबादी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे भविष्य की पीढ़ियों में आनुवंशिक आधार को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव प्रजनन और अन्य जैविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।इसी कारण बाघों के स्थानांतरण के साथ उनके आवास, भोजन और सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। केवल संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जंगल में बाघों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाए रखना भी संरक्षण अभियान का अहम हिस्सा है।
चीतल लाने की भी तैयारी
दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली के डियर पार्क से 400 चीतल लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।चीतल बाघों के प्रमुख प्राकृतिक शिकार प्राणियों में शामिल हैं। जंगल में शिकार प्रजातियों की पर्याप्त उपलब्धता बाघों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद करती है। इससे बाघों को भोजन की तलाश में लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है।हालांकि, चीतलों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में भी तय वन्यजीव प्रोटोकॉल और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना होगा। बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए आवास, पानी, भोजन और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अधिकारियों की मंजूरी के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट के अनुसार, महाराष्ट्र के ताड़ोबा-अंधारी और पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन लाने की तैयारी है। दोनों राज्यों के उच्च अधिकारियों की स्वीकृति मिलने के बाद बाघिनों का चयन कर स्थानांतरण किया जाएगा।फिलहाल योजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मंजूरी का इंतजार है। स्वीकृति मिलने के बाद बाघिनों को चिह्नित करने और स्थानांतरण की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।
हाड़ौती में वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से बाघिनें लाने की योजना हाड़ौती में बाघ संरक्षण के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढ़ाने की उम्मीद है।इसके साथ ही सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर, रेडियो कॉलर और शिकार प्रजातियों की उपलब्धता जैसे कदम भी अहम रहेंगे। इन प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाघिनें नए वातावरण में कितनी अच्छी तरह ढलती हैं और उन्हें जंगल में पर्याप्त संसाधन मिलते हैं या नहीं।फिलहाल वन विभाग की नजर अधिकारियों की मंजूरी और स्थानांतरण की समयसीमा पर है। मंजूरी मिलने के बाद हाड़ौती के जंगलों में बाघ संरक्षण अभियान को अगले चरण में ले जाने का रास्ता साफ हो सकता है।