CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग को लेकर ओम बिरला का बयान, बोले- तय प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की मांग के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि किसी नए महाभियोग प्रस्ताव पर निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध कर रहा है। इस बीच संसद के सत्रावसान, महिला आरक्षण और तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की सदस्यता का मुद्दा भी चर्चा में है।
महाभियोग प्रस्ताव आया तो नियमों के मुताबिक होगी कार्रवाई
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष कोई नया प्रस्ताव लाता है, तो तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।बिरला के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए भी वही संवैधानिक प्रक्रिया लागू होती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित है। ऐसे मामलों में नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का पालन जरूरी है।मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है। इसके लिए संसद में विशेष प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
SIR को लेकर विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में शक्तियों का एकतरफा और मनमाना इस्तेमाल किया गया।विपक्षी प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंप चुका है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और निर्वाचन आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून को रद्द करने की मांग शामिल बताई गई है।विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठा रहा है। हालांकि, लगाए गए आरोपों और उनके आधार का स्वतंत्र सत्यापन अलग विषय है।
पहले के प्रस्तावों को लेकर क्या स्थिति है?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए विपक्ष पहले भी प्रस्ताव संबंधी प्रयास कर चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले प्रयास के नोटिस लोकसभा और राज्यसभा में खारिज किए गए थे।वहीं, दूसरे प्रयास से जुड़े नोटिसों की स्थिति को लेकर जानकारी सामने आई है कि वे विचाराधीन हैं। ऐसे में प्रस्तावों की मौजूदा संसदीय स्थिति और प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे।मुख्य निर्वाचन आयुक्त राष्ट्रपति को लिखित इस्तीफा देकर भी पद छोड़ सकते हैं। लेकिन विपक्ष फिलहाल संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की मांग उठा रहा है।
महिला आरक्षण पर विशेष सत्र की अटकलें
महिला आरक्षण लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चा भी तेज है। राजनीतिक हलकों में 131वें संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।इस विषय पर पूछे जाने पर ओम बिरला ने कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। इसलिए विशेष सत्र बुलाने और विधेयकों को पेश करने की बात फिलहाल संभावित चर्चा के दायरे में है।महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा और इससे जुड़े संवैधानिक बदलावों पर सरकार का आधिकारिक रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
संसद का सत्रावसान अब तक क्यों नहीं हुआ?
मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। हालांकि, खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, उसका औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ है।ओम बिरला ने कहा कि सदन के स्थगन और सत्रावसान के बीच लंबा अंतराल पहले भी रहा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 85 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें संसद के सत्रों से जुड़े प्रावधान स्पष्ट हैं।अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति संसद के सदनों को बुलाते और सत्रावसान करते हैं। दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। हालांकि, सत्रावसान के लिए अलग से कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है।
TMC के बागी सांसदों की सदस्यता पर भी सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों की सदस्यता का मामला भी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है। खबर के मुताबिक, ये सांसद पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं।टीएमसी की ओर से इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की याचिका दायर की गई है। पार्टी का तर्क है कि दूसरी पार्टी में शामिल होना स्वेच्छा से सदस्यता छोड़ने के समान है।ओम बिरला ने बताया कि मामले में अदालत और उनके समक्ष कार्यवाही चल रही है। दोनों पक्षों को सुना जा रहा है। संबंधित जवाब मिलने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
ब्रिक्स संसदीय मंच में आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा
भारत 26 अक्टूबर से दो दिवसीय ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उम्मीद जताई कि बैठक में आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया। बिरला ने उम्मीद जताई कि मंच से साझा घोषणापत्र जारी हो सकता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन में शामिल होने और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करने की जानकारी भी दी गई है। बैठक के लिए 18 देशों ने अपने सुझाव भेजे हैं। वहीं, सऊदी अरब और इथियोपिया की पुष्टि का इंतजार बताया गया है।