प्राकृतिक खेती से स्वस्थ समाज और समृद्ध किसान का निर्माण संभव : डॉ. संजय जायसवाल
कृषि विज्ञान केन्द्र, नवगांव में प्राकृतिक खेती पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित
नवगांव (अलवर), 16 जून। कृषि विज्ञान केन्द्र, नवगांव (अलवर-1) में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, उसके लाभों एवं व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
बड़ी संख्या में किसान और अधिकारी हुए शामिल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजय जायसवाल, माननीय सांसद पश्चिम चंपारण (बिहार) रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में अशोक गुप्ता, सुखवंत सिंह, नारायण मीणा, नरेश गोयल, रानू पाराशर, कमल भादवा, इन्द्रजीत सिंह तथा सरिता राज मौजूद रहे।
कार्यक्रम में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि कॉलेज, कृषि अनुसंधान केन्द्र और कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ 500 से अधिक किसान, कृषक महिलाएं और विद्यार्थी शामिल हुए।
प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
मुख्य अतिथि डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। इससे खेती की लागत कम होती है, भूमि की उर्वरता बनी रहती है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व पौष्टिक खाद्य सामग्री प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम देख चुके हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर इसे जनआंदोलन बनाने की अपील की।
प्रदर्शन इकाइयों का कराया भ्रमण
कार्यक्रम की व्यवस्थाएं के.एल. मीणा, उप निदेशक उद्यान विभाग, अलवर द्वारा संभाली गईं। कृषि विज्ञान केन्द्र में स्थापित केंचुआ पालन, गिर गाय इकाई और बकरी पालन जैसी प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कराया गया।
इन इकाइयों की जानकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र नवगांव द्वारा दी गई। कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन, कृषि अधिकारी, अलवर ने किया।
किसानों को सिखाई गई प्राकृतिक खेती की तकनीक
कार्यशाला के दौरान डॉ. पूनम प्रजापति ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों की व्यवहारिक जानकारी दी। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत तथा प्राकृतिक पौध संरक्षण घोलों को तैयार करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं तथा कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
बाजरा और मूंग की उन्नत खेती पर विशेष जानकारी
डॉ. जी.एल. चौधरी, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान केन्द्र, अलवर ने किसानों को बाजरा और मूंग की उन्नत खेती के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने उन्नत किस्मों के चयन, बीज उपचार, पोषण प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की और किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।
इस अवसर पर अतिथियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा अधिक से अधिक पेड़ लगाने और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने का संकल्प
कार्यशाला का समापन प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ किया गया।