Bombay High Court: कौन हैं नए चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी? इलाहाबाद HC से है खास नाता
बॉम्बे हाई कोर्ट को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने 9 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार समेत राज्य सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे। जस्टिस त्रिपाठी का न्यायिक और कानूनी करियर तीन दशक से ज्यादा लंबा रहा है और उनका इलाहाबाद हाई कोर्ट से भी गहरा नाता रहा है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के 50वें चीफ जस्टिस बने
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी अब बॉम्बे हाई कोर्ट के 50वें मुख्य न्यायाधीश हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को हुई बैठक में उनके नाम की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनका कार्यकाल 20 जून 2028 तक रहने की संभावना है, जब वह सेवानिवृत्त होंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट से बॉम्बे हाई कोर्ट तक का सफर
बॉम्बे हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस बनने से पहले महेश चंद्र त्रिपाठी इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबे न्यायिक अनुभव के बाद अब उन्हें देश के प्रमुख हाई कोर्ट में से एक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की उपलब्धता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
1990 में पूरी की कानून की पढ़ाई
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी ने 1990 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 11 जनवरी 1992 को उन्होंने अधिवक्ता के तौर पर नामांकन कराया।
वकालत के शुरुआती दौर में उन्होंने मुख्य रूप से सिविल मामलों की पैरवी की। कानूनी क्षेत्र में अनुभव बढ़ने के साथ उन्होंने सरकारी मामलों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए भी किया काम
अक्टूबर 2007 से जस्टिस त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से जुड़े विभिन्न कानूनी मामलों में पैरवी की।
सरकारी वकालत के अनुभव ने उनके न्यायिक करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2013 में बने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज
महेश चंद्र त्रिपाठी को 27 सितंबर 2013 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। करीब डेढ़ साल बाद 10 अप्रैल 2015 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया।
इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबे समय तक न्यायिक जिम्मेदारियां निभाईं। वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए उपयुक्त माना।
बॉम्बे हाई कोर्ट में कितने जज हैं?
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी के मुख्य न्यायाधीश पद संभालने के समय बॉम्बे हाई कोर्ट में 74 न्यायाधीश कार्यरत बताए गए हैं। वहीं अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 94 है।
इस तरह स्वीकृत पदों की तुलना में मौजूदा न्यायाधीशों की संख्या कम है। नए मुख्य न्यायाधीश के सामने न्यायिक कामकाज को सुचारू रखने और मामलों के प्रभावी निपटारे की चुनौती महत्वपूर्ण रहेगी।
किन राज्यों और क्षेत्रों तक है बॉम्बे हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र?
बॉम्बे हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र महाराष्ट्र और गोवा के अलावा केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव तक फैला हुआ है।
इस व्यापक क्षेत्राधिकार के कारण बॉम्बे हाई कोर्ट देश की महत्वपूर्ण उच्च न्यायिक संस्थाओं में शामिल है। नए चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी के सामने इतनी बड़ी न्यायिक व्यवस्था का प्रशासन संभालना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
अब नए चीफ जस्टिस के सामने क्या चुनौतियां?
महेश चंद्र त्रिपाठी के कार्यकाल में बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर खास नजर रहेगी। न्यायाधीशों की उपलब्धता, लंबित मामलों का निपटारा और अदालत के कामकाज को प्रभावी बनाए रखना प्रमुख चुनौतियों में शामिल हो सकता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबे अनुभव के बाद अब बॉम्बे हाई कोर्ट में उनकी नई भूमिका पर न्यायिक जगत की नजर रहेगी।