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‘बंगाली भाषा खतरा है तो 8वीं अनुसूची से हटा दें’, अधीर रंजन ने अमित शाह को लिखा पत्र

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों की कथित प्रोफाइलिंग और हिरासत को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। चौधरी ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर समेत कुछ अन्य राज्यों में बंगाली बोलने वाले भारतीय मजदूरों, घरेलू कामगारों और महिलाओं को बांग्लादेशी होने के संदेह में निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने गृह मंत्रालय से भाषा के आधार पर किसी नागरिक की पहचान या कार्रवाई किए जाने पर रोक लगाने और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

अमित शाह को पत्र लिखकर जताई चिंता

अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर बंगाली भाषी भारतीय नागरिकों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर गरीब मजदूरों और अन्य लोगों को केवल बंगाली भाषा बोलने के आधार पर संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

चौधरी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में बंगाली भाषी लोगों की कथित प्रोफाइलिंग और हिरासत की जानकारी सामने आई है। उन्होंने केंद्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।

‘बांग्लादेशी होने के शक में बनाया जा रहा निशाना’

कांग्रेस नेता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल और असम से दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाने वाले कुछ मजदूरों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पूछताछ या हिरासत का सामना करना पड़ा।

चौधरी ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों के पास आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय पहचान दस्तावेज मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है और अलग-अलग मामलों में दस्तावेजों की जांच तथा पुलिस की कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है।

भाषा के आधार पर नागरिकता पर सवाल क्यों?

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि किसी व्यक्ति की मातृभाषा को उसकी नागरिकता या देशभक्ति तय करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कथित हिरासत के दौरान परिवारों के अलग होने को लेकर भी चिंता जताई।

उन्होंने गृह मंत्रालय से ऐसे स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी व्यक्ति की भाषा या भाषाई पहचान को अपने आप में आपराधिक प्रोफाइलिंग का आधार न बनाएं।

‘बंगाली भारत की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा’

चौधरी ने अपने पत्र में बंगाली भाषा की संवैधानिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंगाली भारत में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है और इसके करोड़ों वक्ता हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बंगाली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषा है। ऐसे में केवल बंगाली बोलने के कारण किसी भारतीय नागरिक से अपनी देशभक्ति साबित करने की मांग नहीं की जानी चाहिए।

‘बंगाली भाषा खतरा है तो 8वीं अनुसूची से हटा दें’

अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार या किसी राज्य को बंगाली भाषा से खतरा महसूस होता है तो संसद में प्रस्ताव लाकर उसे संविधान की आठवीं अनुसूची से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जब तक बंगाली को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है, तब तक किसी नागरिक को अपनी मातृभाषा बोलने के कारण संदेह की नजर से देखना उचित नहीं है।

छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों का मामला चर्चा में

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ओडिशा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों की पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मजदूरों को अवैध प्रवासी होने के संदेह में हिरासत में लिया गया और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कुछ मामलों में उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं के तथ्य और पुलिस की कार्रवाई संबंधित मामलों में अलग हो सकती है।

अब गृह मंत्रालय के जवाब पर नजर

अधीर रंजन चौधरी की ओर से उठाए गए मुद्दे के बाद अब निगाहें केंद्रीय गृह मंत्रालय और संबंधित राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया पर हैं। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि अवैध प्रवासियों की पहचान और भारतीय नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।

किसी व्यक्ति की नागरिकता का सत्यापन दस्तावेजों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। वहीं, यदि किसी नागरिक को केवल उसकी भाषा के आधार पर निशाना बनाए जाने के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।

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Stv News Rajasthan

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