BJP–AIMIM गठबंधन से महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल, अकोट नगर परिषद में बना अनोखा समीकरण….
महाराष्ट्र के अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भाजपा और AIMIM का अप्रत्याशित गठबंधन पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा रहा है। जिन दो पार्टियों को आमतौर पर एक-दूसरे का कट्टर विरोधी माना जाता है, वे स्थानीय सत्ता का गणित साधने के लिए एक मंच पर आ गईं। यह गठबंधन केवल चौंकाने वाला नहीं, बल्कि कई नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म देने वाला है।
बहुमत न मिलने पर BJP ने खेला बड़ा दांव
अकोट नगर परिषद के 33 सीटों के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन पूर्ण बहुमत से दूर रही। सत्ता का समीकरण फिट करने के लिए भाजपा ने “अकोट विकास मंच” नामक महागठबंधन तैयार किया, जिसे आधिकारिक रूप से जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में रजिस्टर भी कराया गया।
AIMIM समेत वैचारिक विरोधी दल भी हुए एकजुट
इस गठबंधन में शामिल दलों की सूची ने सभी को चौंका दिया। भाजपा, AIMIM, शिवसेना के दोनों धड़े, NCP के दोनों गुट और प्रहार जनशक्ति पक्ष—सभी ने मिलकर मंच बनाया।
✔ BJP — 11 सीट
✔ AIMIM — 5 सीट
✔ प्रहार जनशक्ति — 3 सीट
✔ शिवसेना (उद्धव) — 2 सीट
✔ शिवसेना (शिंदे) — 1 सीट
✔ NCP (अजीत) — 2 सीट
✔ NCP (शरद) — 1 सीट
बहुमत के लिए 25 सीटें चाहिए थीं, और यह गठबंधन आराम से इस आंकड़े को पार कर गया।
विरोध से सहयोग तक—AIMIM का रोल सबसे बड़ा सवाल
AIMIM, जिसे भाजपा अक्सर अपना ‘वोट-कटर’ बताती रही है और चुनावी मंचों पर निशाना बनाती रही है, अब उसी BJP का सत्ता साझेदार बन गई है। नगराध्यक्ष चुनाव में भाजपा की माया धुले ने AIMIM उम्मीदवार फिरोजाबी सिकंदर राणा को बड़े अंतर से हराया था, और कुछ ही दिनों बाद दोनों का हाथ मिलाना लोगों को हैरान कर रहा है।
पवार बनाम पवार की लड़ाई अकोट में खत्म!
राज्य की राजनीति में शरद पवार और अजीत पवार के बीच की दूरी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन अकोट में दोनों गुट एक ही मंच पर बैठते दिखे। इससे यह भी साबित होता है कि स्थानीय स्तर पर राजनीति अक्सर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विचारधारा से बिल्कुल अलग होती है।
शिवसेना के दोनों धड़े भी BJP के साथ
उद्धव ठाकरे गुट और शिंदे गुट, जो सामान्यतः आमने-सामने दिखते हैं, उन्होंने भी भाजपा द्वारा बनाए गए “अकोट विकास मंच” को समर्थन दिया। इससे गठबंधन और भी मजबूत हुआ और भाजपा को प्रशासनिक कार्यों में सुविधा मिली।
गठबंधन की सबसे बड़ी शर्त—सभी को मानना होगा BJP का व्हिप
इस मंच का नेतृत्व BJP करेगी और सभी सहयोगी दलों के सदस्यों को भाजपा द्वारा जारी व्हिप का पालन करना होगा। गटनेता के रूप में भाजपा के रवि ठाकूर को नियुक्त किया गया है, जो 13 जनवरी के उपनगराध्यक्ष चुनाव में नेतृत्व करेंगे।
विपक्ष लगभग खाली—केवल दो पार्टियां बचीं
इतने बड़े गठबंधन के बाद अब विपक्ष सीटों के मामले में बेहद कमजोर दिख रहा है।
✔ कांग्रेस — 6 सीट
✔ वंचित बहुजन अघाड़ी — 2 सीट
यह न्यूनतम संख्या भाजपा-नेतृत्व वाले मंच के लिए सत्ता चलाने को आसान बना देती है।
राजनीतिक विश्लेषण — सिद्धांत या सत्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठबंधन यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर की राजनीति में विचारधारा से ज्यादा मायने सत्ता का गणित रखता है।
✔ सत्ता में बने रहने की रणनीति
✔ स्थानीय मुद्दों पर वोटों का समीकरण
✔ राष्ट्रीय बनाम स्थानीय राजनीति का अंतर
इन सभी कारणों ने इस असामान्य गठबंधन को जन्म दिया। विपक्ष इसे भाजपा की “दोहरी राजनीति” बताकर निशाना बना रहा है, लेकिन भाजपा का कहना है कि यह गठबंधन “विकास” पर आधारित है, न कि विचारधारा पर।
AIMIM-BJP गठबंधन पर उठ रहे गंभीर सवाल
विपक्ष अब पूछ रहा है कि भाजपा कैसे AIMIM को ‘वोट-कटर’ कहकर पूरे देश में प्रचार करती है और स्थानीय स्तर पर उसी पार्टी से गठबंधन कर लेती है। कांग्रेस और VBA ने इसे भाजपा की नैतिक विफलता बताया है।