बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला: 17 करोड़ के फर्जीवाड़े की जांच तेज, 431 मौतों के दावों पर सवाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आया सर्पदंश मुआवजा घोटाला अब पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। 431 कथित मौतों के नाम पर करीब 17.24 करोड़ रुपये के मुआवजे के फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस का मानना है कि कई मामलों में प्राकृतिक या सामान्य मौतों को सर्पदंश बताकर सरकारी सहायता राशि हासिल की गई। इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है।
431 मौतों के दावों से मचा हड़कंप
जांच रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर में सर्पदंश से 431 मौतों का दावा किया गया, जो राज्य के अन्य जिलों की तुलना में बेहद असामान्य है। उदाहरण के तौर पर जशपुर जैसे सर्पदंश प्रभावित क्षेत्र में जहां 96 मौतें दर्ज हैं, वहीं बिलासपुर के आंकड़े कई गुना अधिक पाए गए। इसी असमानता ने प्रशासन को संदेह में डाल दिया और मामले की गहन जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में ही बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
मुआवजा योजना का कैसे हुआ दुरुपयोग
सरकारी नियमों के अनुसार सर्पदंश से मौत होने पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। पुलिस जांच में यह आशंका जताई गई है कि इसी योजना का गलत फायदा उठाकर फर्जी दावे किए गए। कई मामलों में मौत के वास्तविक कारणों को छिपाकर उन्हें सर्पदंश से जोड़ने की कोशिश की गई, ताकि मुआवजे की राशि हासिल की जा सके। यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया होने की संभावना जताई जा रही है।
फर्जी दस्तावेजों से बना कथित नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि सर्पदंश प्रमाणित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों—जैसे पटवारी पंचनामा, कोटवार की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट—का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। पुलिस का मानना है कि इतने बड़े घोटाले के पीछे कई स्तरों पर मिलीभगत हो सकती है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
डॉक्टर, कर्मचारी और वकीलों की भूमिका पर शक
मामले की जांच में तहसील कार्यालय के कर्मचारियों, कुछ स्वास्थ्य कर्मियों और वकीलों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी रिपोर्ट और दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए और मुआवजे की राशि किन खातों तक पहुंची। प्रारंभिक जांच में कई अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है।
14 एफआईआर के बाद बढ़ी सख्ती
इस पूरे मामले में अब तक अलग-अलग थानों में 14 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी नाम सामने आ सकते हैं। फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की मांग
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला सहित कई जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर चूक को भी दर्शाता है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें।
निष्कर्ष: सिस्टम पर बड़ा सवाल
बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की गंभीर मिसाल बन गया है। 431 मौतों के दावे और करोड़ों के मुआवजे ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना और दोषियों तक पहुंचना है।