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‘पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या उसकी अपनी व्यवस्था’, सिंगापुर के पूर्व राजनयिक का तीखा बयान

अमेरिका-ईरान के बीच संवाद में पाकिस्तान की सक्रियता को लेकर जहां इस्लामाबाद इसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बता रहा है, वहीं सिंगापुर के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर सख्त टिप्पणी की है। उनका कहना है कि कुछ राजनयिक सफलताएं किसी देश की मूल समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं। उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों को उसकी आंतरिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि असली संकट देश के भीतर है।

‘कूटनीतिक सफलता से नहीं बदलेंगे हालात’

एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के भविष्य पर सवाल पूछे जाने पर बिलहारी कौसिकन ने कहा कि देश गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, हाल के महीनों में पाकिस्तान ने कुछ कूटनीतिक पहल जरूर की हैं, लेकिन इनसे आम नागरिकों के जीवन पर तत्काल कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने संकेत दिया कि विदेश नीति में मिली सीमित सफलता तब तक पर्याप्त नहीं मानी जा सकती, जब तक उसका लाभ देश की अर्थव्यवस्था और जनता तक न पहुंचे।

आर्थिक संकट को बताया सबसे बड़ी चुनौती

पूर्व राजनयिक ने कहा कि पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति है। उनके मुताबिक, किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि तभी मजबूत होती है जब उसकी आर्थिक बुनियाद मजबूत हो। केवल वैश्विक मंचों पर सक्रिय रहने से विकास, रोजगार और महंगाई जैसी घरेलू समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दीर्घकालिक सुधारों पर ध्यान देना होगा, तभी स्थायी बदलाव संभव होगा।

‘हर समस्या के लिए पड़ोसियों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते’

कार्यक्रम के दौरान जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने देश की परेशानियों के लिए भारत और अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, तो कौसिकन ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की हर समस्या का कारण केवल उसकी भौगोलिक स्थिति या पड़ोसी देश नहीं हो सकते। उनके अनुसार, पाकिस्तान की वर्तमान परिस्थितियों के लिए उसके राजनीतिक नेतृत्व और संस्थागत फैसलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने जोर दिया कि आंतरिक सुधारों के बिना बाहरी कारणों को दोष देना समाधान नहीं है।

भारत की भूमिका पर भी रखी राय

भारत की रणनीतिक भूमिका पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए बिलहारी कौसिकन ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने माना कि भारत रक्षा निर्यात बढ़ा रहा है और कई देशों के साथ सुरक्षा सहयोग का विस्तार कर रहा है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उसे सीधे अमेरिका के विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता। भारत अपनी क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतिक हितों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच आर्थिक स्थिरता, रक्षा सहयोग और कूटनीतिक संतुलन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। ऐसे समय में किसी भी देश की वैश्विक भूमिका केवल उसके कूटनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक क्षमता, संस्थागत मजबूती और दीर्घकालिक रणनीति से तय होती है।

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