बीकाजी के संस्थापक शिव रतन अग्रवाल का निधन: स्वाद, संस्कार और व्यवसायिक ईमानदारी की विरासत छोड़ गए ‘फन्ना बाबू’
Shiv Ratan Agarwal, Bikaji Foods International Limited के चेयरमैन और भारतीय स्नैक इंडस्ट्री के प्रमुख स्तंभों में से एक, का 23 अप्रैल 2026 को चेन्नई में हार्ट अटैक से निधन हो गया। 75 वर्षीय अग्रवाल ने ‘बीकाजी’ को एक स्थानीय ब्रांड से अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। वे अपने सादगीपूर्ण जीवन, मानवीय मूल्यों और व्यवसाय में गुणवत्ता व विश्वास के लिए जाने जाते थे।
विरासत से अलग पहचान बनाने का साहस
Shiv Ratan Agarwal का जन्म 4 मई 1951 को हुआ था और वे Haldiram’s परिवार से संबंध रखते थे। 1990 के दशक में जब परिवारिक कारोबार का विभाजन हुआ, तब उनके सामने स्थापित नाम के साथ आगे बढ़ने या नया रास्ता चुनने का विकल्प था। उन्होंने जोखिम उठाते हुए 1993 में ‘बीकाजी’ की स्थापना की। यह निर्णय उनके आत्मविश्वास और दूरदर्शिता का प्रतीक बना। उन्होंने साबित किया कि विरासत महत्वपूर्ण है, लेकिन अपनी अलग पहचान बनाना ही असली सफलता है।
भुजिया को बनाया वैश्विक पहचान का प्रतीक
Bikaji Foods International Limited को वैश्विक ब्रांड बनाने में अग्रवाल की सोच निर्णायक रही। उन्होंने बीकानेर की पारंपरिक भुजिया को सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि संस्कृति का प्रतीक माना। विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने मशीनी तकनीक को अपनाया और भारत में पहली बार मशीन से बनी भुजिया का उत्पादन शुरू किया। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी और गुणवत्ता में स्थिरता आई, जिसके चलते बीकाजी का स्वाद दुनिया भर में पहचाना जाने लगा।
तकनीक और परंपरा के संतुलन का संदेश
Shiv Ratan Agarwal हमेशा कहते थे कि “मशीनें सिर्फ रफ्तार बढ़ाती हैं, संस्कार नहीं।” उनका मानना था कि तकनीक को अपनाना जरूरी है, लेकिन उत्पाद की आत्मा यानी स्वाद और गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस सिद्धांत को अपने व्यवसाय में उतारकर दिखाया। उनके नेतृत्व में बीकाजी ने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक स्वाद के बीच संतुलन कायम रखा, जो उनकी सफलता का मुख्य आधार बना।
मानवीय मूल्यों और सेवा भावना की मिसाल
अग्रवाल सिर्फ एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि उदार और संवेदनशील व्यक्तित्व भी थे। उन्हें करीबी लोग ‘फन्ना बाबू’ के नाम से जानते थे। उन्होंने कई जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता की, बिना किसी प्रचार या हिसाब-किताब के। कर्मचारियों के प्रति उनका व्यवहार अभिभावक जैसा था। वे न केवल उनके काम की चिंता करते थे, बल्कि व्यक्तिगत कठिनाइयों में भी साथ खड़े रहते थे। उनकी यह मानवीय सोच उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।
ब्रांड में भरोसे और गुणवत्ता की पहचान
Amitabh Bachchan को ब्रांड एंबेसडर बनाने के पीछे भी अग्रवाल की सोच स्पष्ट थी—भरोसा और गुणवत्ता। उनका मानना था कि जब ग्राहक बीकाजी का पैकेट खरीदे, तो उसे उसी स्तर का विश्वास महसूस हो, जैसा अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व से जुड़ा है। उन्होंने ब्रांड को सिर्फ उत्पाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे भरोसे और विश्वसनीयता का प्रतीक बनाया।
एक युग का अंत, प्रेरणा की शुरुआत
Shiv Ratan Agarwal का निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने अपने विजन और मेहनत से एक वैश्विक ब्रांड खड़ा किया। उनकी कहानी यह सिखाती है कि सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि सोच, ईमानदारी और मेहनत से मिलती है। वे अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।