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भीलवाड़ा में तीन दिन से लापता दो मासूमों के शव तालाब से मिले, परिजनों का पुलिस पर लापरवाही का आरोप

भीलवाड़ा। तीन दिन से लापता 10 वर्षीय दिव्यांश उर्फ डग्गू और 13 वर्षीय रजत की तलाश मंगलवार शाम दर्दनाक अंत में बदल गई। दोनों बच्चों के शव पालड़ी तालाब से बरामद हुए। शव कई घंटे पानी में रहने के कारण क्षत-विक्षत हालत में थे। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिजन बेसुध हो गए। कलकीपुरा मोहल्ले में मातम छा गया। वहीं, महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिजनों और नागरिकों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

तीन दिन से लापता थे दोनों बच्चे

दिव्यांश और रजत रविवार दोपहर अपने एक अन्य दोस्त के साथ साइकिल से घर से निकले थे। दोनों को आखिरी बार तीसरे साथी के साथ सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था। इसके बाद दोनों घर वापस नहीं लौटे।परिजनों ने बच्चों की तलाश शुरू की। पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई। तीन दिनों तक शहर में बच्चों की तस्वीरों के जरिए तलाश जारी रही। परिवार लगातार उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था।

सीसीटीवी से मिली अहम कड़ी

जांच के दौरान पुलिस को दोनों बच्चों के एक तीसरे साथी के साथ साइकिल पर जाने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने तीसरे बच्चे और उसके पिता से पूछताछ की।भीमगंज थाना प्रभारी सुनील चौधरी के अनुसार पूछताछ में तीसरे साथी ने बताया कि रविवार को तीनों पालड़ी तालाब के पास गए थे। उसके मुताबिक दिव्यांश और रजत तालाब के पानी में उतर गए थे। वह खुद डर गया और साइकिल लेकर अकेला घर लौट आया।इस जानकारी के बाद पुलिस ने पालड़ी तालाब में तलाश शुरू की।

तालाब से मिले दोनों बच्चों के शव

सूचना मिलने के बाद एसपी राणा, एएसपी राजेश आर्य और सीओ सिटी सज्जन सिंह मौके पर पहुंचे। तालाब के किनारे बच्चों के कपड़े भी मिले।इसके बाद पानी में तलाशी अभियान चलाया गया। पुलिस टीम ने दोनों बच्चों के शव तालाब से बाहर निकाले। तीन दिन तक पानी में रहने के कारण शव क्षत-विक्षत हालत में थे। मौके पर एफएसएल टीम को भी बुलाया गया और आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए।

डग्गू की मां हुई बेसुध, रजत के दादा-दादी का रो-रोकर बुरा हाल

दोनों बच्चों की मौत की खबर परिवारों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। दिव्यांश की मां, पिता हेमंत सोनी और उसकी दोनों बहनें बिलख उठीं। मां बार-बार पुलिस से सवाल करती रही कि अगर समय रहते बच्चे मिल जाते तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता।वहीं रजत का पालन-पोषण करने वाले उसके दादा-दादी भी बच्चे की मौत की खबर सुनकर टूट गए। दोनों बच्चे आपस में काफी करीब थे। वे साथ खेलते और पढ़ते थे। रविवार को भी दोनों एक अन्य दोस्त के साथ हंसते-खेलते घर से निकले थे।

मोर्चरी के बाहर फूटा परिजनों का गुस्सा

दोनों बच्चों के शव महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग वहां जमा हो गए। परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।परिवार का आरोप है कि यदि पुलिस ने शुरुआती जांच में तीसरे साथी से गंभीरता से पूछताछ की होती, तो शायद बच्चों की तलाश जल्द पूरी हो सकती थी। इसी बात को लेकर लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए।

पुलिस अधिकारियों ने संभाली स्थिति

माहौल तनावपूर्ण होने की जानकारी मिलने पर कोतवाली थाना प्रभारी हनुमान सिंह और गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की।पुलिस ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। वहीं एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।

पोस्टमार्टम के बाद साफ होगी मौत की स्थिति

दोनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम बुधवार को कराया जाना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।फिलहाल पुलिस तालाब तक बच्चों के पहुंचने और डूबने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। तीसरे साथी के बयान, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल और एफएसएल रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

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Stv News Rajasthan

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