Bemetara Murder Case: पत्नी की हत्या कर आत्महत्या दिखाने की साजिश नाकाम, पति को उम्रकैद
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पत्नी की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करने वाले आरोपी पति को अदालत ने दोषी ठहराया है। न्यायालय ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों की अहम भूमिका को भी रेखांकित करता है।
बाथरूम में मिला था जला हुआ शव, पहले लगा आत्महत्या का मामला
यह मामला बेमेतरा जिले के ग्राम फरी का है, जहां करीब तीन वर्ष पहले एक विवाहित महिला गंगोत्री का जला हुआ शव उसके घर के बाथरूम में मिला था। घटनास्थल पर मिट्टी के तेल का डिब्बा और माचिस मिलने के कारण शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हुआ। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए जांच शुरू की। प्रारंभिक परिस्थितियां आत्महत्या की ओर इशारा कर रही थीं, लेकिन आगे की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए।
पोस्टमार्टम और जांच से खुली हत्या की साजिश
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला की मौत आग लगने से पहले ही हो चुकी थी। चिकित्सीय जांच में यह सामने आया कि महिला की हत्या दम घोंटकर की गई थी और उसके बाद शव को जलाकर आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि घटना वाली रात पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद के दौरान आरोपी ने पत्नी की हत्या की और अपराध छिपाने के उद्देश्य से शव को बाथरूम में ले जाकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी।
फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी सबसे अहम सबूत
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के घटना के समय पहने गए कपड़े जब्त किए। फॉरेंसिक जांच में उन कपड़ों पर मिट्टी के तेल के अवशेष मिलने की पुष्टि हुई। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत आधार प्रदान किया। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह स्थापित किया गया कि आरोपी ने हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश की थी।
अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया
बेमेतरा के सत्र न्यायाधीश सरोजनंद दास की अदालत ने सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी दुर्गेश कुमार विश्वकर्मा को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई और अर्थदंड भी लगाया। मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक ने प्रभावी पैरवी की। अदालत के इस फैसले को वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।