BCI चीफ मनन कुमार मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बड़े फैसलों पर लगी रोक; 5 हफ्ते में होगा नया चुनाव
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर चल रही याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि नई कमेटी के चुनाव तक मौजूदा BCI नेतृत्व बड़े नीतिगत फैसले अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति के बिना नहीं ले सकेगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने देशभर की राज्य बार काउंसिलों के गठन और BCI की नई कमेटी के चुनाव की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को तय की है।
मनन कुमार मिश्रा फिलहाल प्रो-टेम चेयरमैन
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव हो चुके हैं और अब उनके प्रतिनिधियों के जरिए BCI की नई कमेटी का गठन किया जाना है। तब तक मनन कुमार मिश्रा प्रो-टेम चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं।
जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि मिश्रा को नए कार्यकाल के लिए लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित नहीं किया गया है। ऐसे में नई निर्वाचित बॉडी के अस्तित्व में आने तक उनकी भूमिका रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज तक सीमित रहेगी।
बड़े नीतिगत फैसलों के लिए AG और SG की सहमति जरूरी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतरिम अवधि में BCI के बड़े नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी और सहमति जरूरी होगी। दोनों वरिष्ठ कानून अधिकारी BCI के पदेन सदस्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई निर्वाचित कमेटी के गठन तक दोनों वरिष्ठ लॉ ऑफिसर्स को कुछ समय के लिए BCI के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
मिश्रा के कार्यकाल को लेकर क्या है विवाद?
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि BCI के नियम 12(2) के तहत चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, अप्रैल 2025 में जारी एक अधिसूचना के जरिए मनन कुमार मिश्रा का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक बढ़ाया गया।
याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि मिश्रा एक ट्रस्ट बनाकर BCI की संपत्तियों को उसमें स्थानांतरित कर रहे हैं। हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनका BCI की ओर से पेश वकीलों ने विरोध किया।
तुरंत हटाने की मांग पर SC ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान, गोपाल शंकरनारायण और सी.यू. सिंह ने कोर्ट से तत्काल नई कमेटी गठित करने की मांग की।
वहीं, BCI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह और डी.एस. नायडू ने याचिका में लगाए गए आरोपों का विरोध किया।
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल चेयरमैन को हटाने का आदेश देना उचित नहीं होगा। इसके बजाय अदालत ने BCI चुनाव की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया।
5 हफ्ते में पूरी होगी नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों और BCI चुनाव को लेकर समयबद्ध निर्देश दिए हैं।
- राज्य बार काउंसिलों के चुनाव हो चुके हैं। केवल दो महिला सदस्यों का मनोनयन बाकी है। संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दो सप्ताह के भीतर इनका मनोनयन करना होगा।
- महिला सदस्यों के मनोनयन के एक सप्ताह के भीतर संबंधित स्टेट बार काउंसिल के गठन की अधिसूचना जारी करनी होगी।
- इसके बाद तीन सप्ताह के भीतर स्टेट बार काउंसिल अपने चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव करेगी।
- इसी प्रक्रिया में BCI में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य का भी चुनाव किया जाएगा।
17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक करीब 5 सप्ताह में सभी राज्य बार काउंसिलों के प्रतिनिधि तय होने की प्रक्रिया पूरी होनी है। इसके बाद यही प्रतिनिधि BCI की नई कमेटी और उसके पदाधिकारियों के चुनाव में भूमिका निभाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। उस दिन अदालत अपने निर्देशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लेगी।