बांग्लादेश का 86 हजार करोड़ टका का रक्षा आधुनिकीकरण प्लान, फाइटर जेट से लेकर युद्धपोत तक होंगे शामिल
बांग्लादेश सरकार ने अगले एक दशक में अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक बनाने के लिए बड़ा रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम पेश किया है। योजना के तहत लड़ाकू विमान, युद्धपोत, मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन तकनीक और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करना है।
10 साल में सेना के आधुनिकीकरण का रोडमैप
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संसद में रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने तीन साल की प्रारंभिक योजना और उसके बाद सात साल के विस्तारित कार्यक्रम के साथ कुल 10 वर्षों का रोडमैप तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके लिए लगभग 86 हजार करोड़ टका खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
वायुसेना को मिलेंगे आधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम
योजना के तहत बांग्लादेश वायुसेना के लिए चौथी पीढ़ी के मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MRCA), अटैक हेलीकॉप्टर, मध्यम दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली, एंटी-ड्रोन तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम खरीदने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे हवाई सुरक्षा क्षमता और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने की ताकत बढ़ेगी।
नौसेना के बेड़े का भी होगा विस्तार
रक्षा कार्यक्रम में नौसेना के लिए आधुनिक फ्रिगेट, कार्वेट, ऑफशोर पेट्रोल वेसल और पनडुब्बियों की खरीद भी शामिल है। साथ ही नए नौसैनिक अड्डों का विकास, बिना पायलट वाले समुद्री प्लेटफॉर्म का उपयोग और घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
ड्रोन तकनीक और स्वदेशी रक्षा उद्योग पर फोकस
सरकार ने मानवरहित हवाई वाहन (UAV), काउंटर-UAV सिस्टम और उन्नत निगरानी तकनीकों को सेना में शामिल करने का फैसला किया है। इसके अलावा बोगुरा में तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के जरिए UAV निर्माण संयंत्र विकसित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य हथियारों और सैन्य उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना है।
घरेलू निर्माण और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा योजना के तहत आधुनिक असॉल्ट राइफल, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, गोला-बारूद, बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट जैसे सैन्य उपकरणों के घरेलू निर्माण की क्षमता विकसित की जाएगी। साथ ही रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी योजना है। सरकार का कहना है कि इससे भविष्य में स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी।