राम मंदिर चढ़ावा विवाद संसद पहुंचा, कांग्रेस ने लगाए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप; सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर कांग्रेस ने संसद में गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर दान राशि के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर संसद में व्यापक चर्चा कराने की भी मांग की गई है। फिलहाल ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित पक्ष की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया गया मामला
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में नियमों के तहत कार्यवाही स्थगित कर राम मंदिर दान प्रबंधन के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण और धार्मिक आस्था के तहत नकद राशि तथा आभूषण दान किए हैं। ऐसे में यदि दान के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक पारदर्शिता का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
कथित अनियमितताओं और CCTV फुटेज को लेकर लगाए आरोप
स्थगन प्रस्ताव में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। पार्टी का दावा है कि मंदिर परिसर की कई महीनों की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों ने शुरुआती स्तर पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिलाया था, उन्हें बाद में उनके पद से हटा दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित संस्थाओं की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
SIT जांच और FIR पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और दर्ज की गई FIR को लेकर भी कांग्रेस ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी का आरोप है कि अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए ताकि जिम्मेदारी तय करने में किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश न रहे। सरकार की ओर से SIT जांच जारी रहने की बात कही जा चुकी है।
संसद में स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक संस्था में दान और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। इसी उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग रखी गई है। विपक्ष का मानना है कि इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
अन्य मुद्दों पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा
राम मंदिर दान विवाद के अलावा विपक्ष ने संसद में कई अन्य विषयों पर भी चर्चा की मांग उठाई। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दल-बदल कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताते हुए नए कानून की मांग की। वहीं राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कावेरी जल विवाद को लेकर सरकार के लिखित जवाब पर सवाल उठाए और किसानों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति अपनाई।