अलवर में शादी का कार्ड खोलते ही खाते से निकले ₹5.42 लाख, APK फाइल के जरिए साइबर ठगी का आरोप
अलवर के मुलतान नगर निवासी 51 वर्षीय रूपेश पंजाबी साइबर ठगी का शिकार हो गए। उनके मोबाइल पर शादी के कार्ड के नाम से एक APK फाइल भेजी गई थी। फाइल खोलने के बाद उनके बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 5.42 लाख रुपये निकल गए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब ठगी के तरीके और आरोपियों की पहचान का पता लगाने में जुटी है।
शादी का निमंत्रण समझकर खोली फाइल, खाते से निकलने लगे रुपये
अलवर में साइबर ठगी का यह मामला मोबाइल पर आने वाले अनजान मैसेज और फाइलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताता है। मुलतान नगर निवासी रूपेश पंजाबी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 10 अक्टूबर की रात करीब 10:10 बजे उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया था। इसमें केसरोली निवासी मुस्ताक खान के नाम से शादी का कार्ड भेजा गया था।रूपेश ने मैसेज को शादी का निमंत्रण समझा और उसके साथ आई फाइल खोल ली। इसके बाद उनके बैंक खाते से रकम निकलने लगी। जब उन्हें ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली, तब तक खाते से कुल 5 लाख 42 हजार रुपये निकाले जा चुके थे।
अलग-अलग ट्रांजेक्शन से निकाली गई 5.42 लाख रुपये की रकम
पीड़ित के अनुसार, बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाली गई। ठगी का पता चलने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और मोबाइल पर भेजी गई फाइल का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल, आरोपियों की पहचान और ठगी में इस्तेमाल की गई तकनीक को लेकर अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
APK फाइल क्या होती है और इससे कैसे हो सकती है ठगी?
APK एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल का प्रारूप है। साइबर ठग कई बार शादी के निमंत्रण, फोटो, दस्तावेज या जरूरी जानकारी के नाम पर ऐसी फाइल भेजते हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजान स्रोत से आई फाइल इंस्टॉल कर लेता है, तो मोबाइल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप संवेदनशील जानकारी चुराने, संदिग्ध गतिविधियां करने या डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, इस मामले में केवल फाइल खोलने से ठगी हुई या फाइल इंस्टॉल भी की गई थी, यह स्पष्ट नहीं है। वास्तविक तरीका पुलिस की तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
शादी का कार्ड या अनजान फाइल आए तो बरतें सावधानी
मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से शादी का कार्ड या अन्य फाइल आए, तो उसे खोलने से पहले भेजने वाले से पुष्टि करें। केवल परिचित व्यक्ति का नाम देखकर किसी फाइल पर भरोसा न करें। खासतौर पर APK फाइल को सामान्य फोटो या PDF समझकर इंस्टॉल न करें।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- अनजान नंबर से आई APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
- मोबाइल की सेटिंग में अनजान स्रोतों से ऐप इंस्टॉल करने की अनुमति बंद रखें।
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- ऐप को अनावश्यक परमिशन देने से बचें।
- मोबाइल और बैंकिंग ऐप को अपडेट रखें।
- बैंक खाते के मैसेज और ट्रांजेक्शन पर नजर रखें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि बैंक खाते से बिना अनुमति रकम निकल जाए, तो तुरंत बैंक को सूचना दें और खाते या संबंधित डिजिटल भुगतान सुविधा को सुरक्षित कराने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।जल्दी शिकायत करने से संबंधित लेनदेन पर समय रहते कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। इसलिए किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलते ही देरी किए बिना शिकायत करना जरूरी है।
साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना जरूरी
अलवर का यह मामला बताता है कि शादी के कार्ड जैसे सामान्य संदेश के जरिए भी साइबर ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए मोबाइल पर आने वाली फाइलों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। किसी फाइल को खोलने या इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करें। वहीं, ठगी की स्थिति में बैंक और साइबर पुलिस को तुरंत सूचना दें। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि 5.42 लाख रुपये की ठगी को अंजाम देने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया।