चित्तौड़गढ़: 74 साल की उम्र में भी चुनावी मैदान में जोगेंद्र सिंह होड़ा, तीन बार जब्त हुई जमानत फिर भी नहीं मानी हार
चित्तौड़गढ़ जिले की गणेशपुरा ग्राम पंचायत के 74 वर्षीय जोगेंद्र सिंह होड़ा एक बार फिर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त होड़ा इस बार गणेशपुरा-रोलाहेड़ा वार्ड नंबर 7 से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ रहे हैं। वे इससे पहले दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। तीनों चुनावों में उनकी जमानत जब्त हो गई थी। होड़ा का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में उनके पिता के नाम की गलती और वेतन से जुड़ी समस्या ने उन्हें व्यवस्था में बदलाव के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
74 साल की उम्र में फिर चुनावी मैदान में उतरे होड़ा
चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी क्षेत्र की गणेशपुरा ग्राम पंचायत निवासी जोगेंद्र सिंह होड़ा का चुनाव लड़ने का उत्साह उम्र के इस पड़ाव पर भी कायम है। जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके होड़ा इस बार पंचायत समिति सदस्य पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वे गणेशपुरा-रोलाहेड़ा वार्ड नंबर 7 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। उनका चुनावी मैदान में उतरना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। होड़ा का कहना है कि वे अपनी मांगों और व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को उठाने के लिए चुनाव लड़ते हैं।
दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं
जोगेंद्र सिंह होड़ा का चुनावी सफर कई वर्षों से जारी है। वे वर्ष 2013 और 2024 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अभिनव लोकतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, इन चुनावों में उन्हें जीत नहीं मिली और उनकी जमानत जब्त हो गई। इसके बावजूद उन्होंने चुनावी राजनीति से दूरी नहीं बनाई। अब पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़कर वे एक बार फिर मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में नोटा से भी ज्यादा मिले थे वोट
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जोगेंद्र सिंह होड़ा को कुल 1,537 वोट मिले थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें नोटा के 1,527 मतों से भी अधिक वोट प्राप्त हुए थे। सादी ग्राम पंचायत के गोपालपुरा गांव स्थित बूथ नंबर 87 पर होड़ा को आठ वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी को पांच मत मिले थे। यह आंकड़ा उस समय चर्चा में रहा था। हालांकि, कुल मतों के लिहाज से होड़ा चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद उनका चुनाव लड़ने का सिलसिला जारी है।
पिता के नाम में गलती को लेकर शुरू हुआ संघर्ष
होड़ा के अनुसार, चुनाव लड़ने के पीछे उनकी प्रमुख वजह सरकारी व्यवस्था में सुधार की मांग है। उनका कहना है कि जनगणना के दौरान सरकारी दस्तावेजों में उनके पिता बलवंत सिंह होड़ा का नाम गलती से बलदेव सिंह होड़ा दर्ज हो गया था। होड़ा का दावा है कि इस गलती को लंबे समय बाद भी ठीक नहीं किया गया। वे इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की गलती ने उन्हें सरकारी व्यवस्था के कामकाज पर सवाल उठाने और सुधार की मांग करने के लिए प्रेरित किया।
वेतन अटकने को भी बताया संघर्ष की वजह
जोगेंद्र सिंह होड़ा का दावा है कि पिता के नाम से जुड़े दस्तावेजी विवाद के कारण मार्च 2001 से फरवरी 2024 के बीच उनका तीन साल का वेतन रुका रहा। उनके अनुसार, इस समस्या ने उन्हें लंबे समय तक परेशान किया। वे सरकारी व्यवस्था में सुधार और आम लोगों की समस्याओं को उठाने के उद्देश्य से चुनाव लड़ने की बात कहते हैं। हालांकि, वेतन रुकने और दस्तावेजों में गलती से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इन तथ्यों की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
हार के बावजूद चुनाव लड़ने का जुनून कायम
लगातार चुनाव हारने और जमानत जब्त होने के बावजूद होड़ा ने चुनावी मैदान में उतरना नहीं छोड़ा है। इस बार पंचायत समिति सदस्य पद का चुनाव उनके राजनीतिक सफर का अगला पड़ाव है। वे चुनाव के माध्यम से अपनी बात लोगों और प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं। उनके चुनाव लड़ने की वजह केवल जीत हासिल करना नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को उठाना भी बताई जा रही है। अब देखना होगा कि वार्ड नंबर 7 के मतदाता उनकी दावेदारी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।