अलवर यूआईटी शिविरों से आमजन को राहत, तीन दिन में मिल रहे पट्टे
अलवर नगर विकास न्यास (यूआईटी) द्वारा संचालित शहरी सेवा शिविर योजना आमजन के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। शिविरों में पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही पट्टे जारी किए जा रहे हैं, जबकि कई मामलों में आवेदन के केवल तीन दिन के भीतर पट्टा उपलब्ध कराया गया है। इससे वर्षों से लंबित पट्टा संबंधी मामलों के समाधान में तेजी आई है और लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिली है।
शिविरों के माध्यम से जारी हुए दर्जनों पट्टे
यूआईटी सचिव स्नेहल नाना दायगुड़े ने बताया कि अब तक आयोजित शिविरों के माध्यम से करीब 70 से 80 पट्टे जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन भूखंडों का लेआउट स्वीकृत है और भूमि परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे भूखंड मालिक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर पट्टे के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ भूमि संबंधी दस्तावेजों की चेन, जमाबंदी और अन्य जरूरी अभिलेख जमा करने होते हैं।
रजिस्ट्री ही नहीं, एग्रीमेंट धारकों को भी लाभ
यूआईटी ने पट्टा वितरण प्रक्रिया में व्यापक दायरा अपनाया है। सचिव ने बताया कि केवल रजिस्ट्री धारकों को ही नहीं, बल्कि एग्रीमेंट के आधार पर भूखंड रखने वाले लोगों को भी पट्टे दिए जा रहे हैं। इसके लिए संबंधित भूखंड पर आवेदक का वास्तविक कब्जा होना आवश्यक है तथा कब्जे से जुड़े पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। दस्तावेजों की जांच और पात्रता सत्यापन के बाद पट्टा जारी किया जा रहा है।
सरकार ने दी बड़ी आर्थिक राहत
राज्य सरकार ने इस योजना के तहत एक महत्वपूर्ण राहत भी प्रदान की है। पहले पट्टा प्रक्रिया के दौरान विज्ञप्ति प्रकाशित कराने का खर्च आवेदक को वहन करना पड़ता था, लेकिन अब यह खर्च नगर विकास न्यास द्वारा उठाया जाएगा। इस निर्णय से आमजन पर आर्थिक भार कम होगा और अधिक लोग पट्टा प्राप्त करने की प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
पारदर्शी और त्वरित सेवाओं पर जोर
यूआईटी सचिव ने बताया कि विभाग का उद्देश्य लोगों को सरल, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना है। शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से पट्टा वितरण की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है ताकि पात्र नागरिकों को समय पर अधिकार पत्र मिल सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविरों में पहुंचकर योजना का लाभ उठाएं।