अलवर मिनी सचिवालय बना ऊर्जा आत्मनिर्भर, 400 किलोवाट सोलर प्लांट से शून्य के करीब बिजली बिल
अलवर के मिनी सचिवालय में स्थापित 400 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट अब हरित ऊर्जा का उदाहरण बनता जा रहा है। जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने प्लांट का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा की। यह प्लांट प्रतिदिन जितनी बिजली उत्पन्न करता है, उतनी ही खपत भी है, जिससे बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।
निरीक्षण में उत्पादन और कार्यप्रणाली पर विशेष फोकस
जिला कलेक्टर ने विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ मिनी सचिवालय परिसर में लगे सोलर प्लांट का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बिजली उत्पादन के दैनिक आंकड़ों, ग्रिड सप्लाई और सिस्टम की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी ली। तकनीकी टीम से चर्चा करते हुए उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि प्लांट निर्धारित मानकों के अनुसार निरंतर कार्य करता रहे। उन्होंने साफ कहा कि उत्पादन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और सिस्टम की दक्षता बनी रहनी चाहिए, जिससे अधिकतम ऊर्जा उत्पादन संभव हो सके।
रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सोलर पैनलों की नियमित सफाई, तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्लांट की समय-समय पर मेंटेनेंस सुनिश्चित की जाए और किसी भी तकनीकी खराबी को तुरंत दूर किया जाए। उनका कहना था कि नियमित देखरेख से न केवल उत्पादन क्षमता बनी रहती है बल्कि उपकरणों की उम्र भी बढ़ती है। उन्होंने साफ किया कि सोलर सिस्टम की दक्षता बनाए रखने के लिए साफ-सफाई और निगरानी बेहद जरूरी है।
हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने का दिया संदेश
डॉ. आर्तिका शुक्ला ने कहा कि सरकारी भवनों पर सोलर प्लांट लगाना ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है। इससे बिजली बिल में कमी के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन भी घटता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में अधिक से अधिक सरकारी संस्थानों और आम नागरिकों को सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सरकार की सब्सिडी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर सोलर पैनल स्थापित करें।
400 किलोवाट प्लांट से रोजाना 1800 यूनिट उत्पादन
विद्युत विभाग के अनुसार मिनी सचिवालय में स्थापित यह सोलर प्लांट 11 जून से संचालित हो रहा है। इसमें कुल 738 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो प्रतिदिन लगभग 1800 यूनिट बिजली का उत्पादन करते हैं। खास बात यह है कि यह उत्पादन मिनी सचिवालय की दैनिक खपत के बराबर है, जिससे बिजली बिल लगभग समाप्त हो गया है। यह मॉडल भविष्य में अन्य सरकारी भवनों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है।