राजस्थान में चांदीपुरा वायरस को लेकर अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी, जानिए लक्षण और बचाव
राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में चांदीपुरा वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। डूंगरपुर और सिरोही के दो बच्चों की गुजरात में उपचार के दौरान मौत के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी, डोर-टू-डोर सर्वे और रोकथाम के उपाय शुरू किए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से बच्चों में तेज बुखार या दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की अपील की गई है।
क्या है चांदीपुरा वायरस और कैसे फैलता है संक्रमण?
चांदीपुरा वायरस एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई (रेत-मक्खी) के काटने से फैलता है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों, कच्चे मकानों की दरारों और मिट्टी वाले इलाकों में अधिक पाई जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण विशेष रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अधिक प्रभावित करता है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकता है, जिससे गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा रहता है।
तेज बुखार और दौरे हो सकते हैं शुरुआती संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस के लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं। इनमें अचानक तेज बुखार, उल्टी, दस्त, अत्यधिक सुस्ती, बेहोशी, शरीर में ऐंठन और मिर्गी जैसे दौरे शामिल हो सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण के शुरुआती 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान समय पर उपचार नहीं मिलता तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल नहीं है कोई विशेष दवा, लक्षणों के आधार पर होता है इलाज
चांदीपुरा वायरस के लिए वर्तमान में कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए उपचार मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने तथा अन्य जटिलताओं से बचाव पर आधारित होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित चिकित्सकीय देखभाल से मरीज की स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे, फॉगिंग और निगरानी तेज
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान शुरू किया है। डूंगरपुर जिले के प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे किया जा रहा है और संदिग्ध लक्षणों वाले बच्चों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही सैंड फ्लाई की रोकथाम के लिए फॉगिंग और कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि तेज बुखार, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण वाले बच्चों को तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और लोगों से अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
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