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अजमेर रेल मंडल में ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ पदनाम पर सवाल, लेवल-2 कर्मचारी को जिम्मेदारी देने की शिकायत

अजमेर। उत्तर-पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल कार्यालय में एक कर्मचारी को ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ के पदनाम से जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि रेलवे के स्थापित पदनामों में ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ नाम का पद अधिसूचित नहीं है। इसके बावजूद लेवल-2 के कर्मचारी को HRMS रिकॉर्ड में इस पदनाम के साथ जिम्मेदारी दिए जाने और उससे जुड़ी सुविधाओं की जांच की मांग की गई है।मामले को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी CVC को शिकायत भेजी गई है। शिकायत में HRMS रिकॉर्ड, सर्विस बुक, ड्यूटी पास, भुगतान, भत्तों और VIP कोटा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। रेलवे अधिकारी ने कहा है कि जरूरत के अनुसार किसी कर्मचारी को कार्यवाहक जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन इससे वेतनमान और सुविधाओं में बदलाव नहीं होता।

CVC से की गई शिकायत

अलखनंदा कॉलोनी निवासी सर्वेश्वर तिवारी की ओर से CVC को भेजी गई शिकायत में कई बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। शिकायत में कर्मचारी को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया और इससे जुड़े प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच का आग्रह किया गया है।इसमें पदनाम बदलने का आधार, यूजर आईडी, मेकर-चेकर प्रक्रिया, सक्षम अधिकारी की मंजूरी और तैनाती आदेश की जांच शामिल है। इसके अलावा स्वीकृत पद और कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड का भी परीक्षण करने की मांग की गई है।

‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ पदनाम पर सवाल

शिकायत में सबसे प्रमुख सवाल ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ पदनाम को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि रेलवे के संस्थापन, सेवा और नियुक्ति नियमों में इस नाम का कोई अधिसूचित पद नहीं है।वहीं, रेलवे में इंस्पेक्टर नाम वाले अन्य पद मौजूद हैं। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर यह जांच कराने की मांग की है कि लेवल-2 के कर्मचारी को किस नियम या आदेश के तहत ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ की जिम्मेदारी दी गई।

लेवल-2 कर्मचारी को मिली प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी

शिकायत के अनुसार अजमेर मंडल कार्यालय में ट्रैकमैन-III या टेक्नीशियन-III श्रेणी के पे मैट्रिक्स लेवल-2 कर्मचारी को HRMS में ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ के तौर पर दर्शाया गया।आरोप है कि कर्मचारी को ‘प्रोटोकॉल टू डीआरएम’ और सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित जिम्मेदारियां भी दी गईं। अब शिकायत में इस तैनाती की प्रक्रिया और जिम्मेदारी देने से जुड़े आदेशों की जांच की मांग की गई है।

भत्तों और भुगतान की भी जांच की मांग

शिकायत में केवल पदनाम तक मामला सीमित नहीं रखा गया है। इसमें कर्मचारी को मिले यात्रा भत्ते और अन्य भुगतान का ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।इसके अलावा ड्यूटी रोस्टर, छुट्टी वाले दिनों में ड्यूटी, उपस्थिति, दौरे के कार्यक्रम और आवाजाही से जुड़े प्रमाणों की जांच का आग्रह किया गया है। भुगतान की स्वीकृति और संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की गई है।

ड्यूटी पास और VIP कोटा भी जांच के दायरे में

शिकायतकर्ता ने निजी यात्रा के दौरान ड्यूटी पास में ‘ऑन ड्यूटी’ दर्शाए जाने की आशंका की भी जांच की मांग की है। इसके अलावा ‘प्रोटोकॉल टू डीआरएम’ के जरिए जारी हुए रिजर्वेशन कोटा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का आग्रह किया गया है।इन सभी बिंदुओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कर्मचारी को दी गई जिम्मेदारियों के साथ कोई अतिरिक्त सुविधा या भुगतान नियमों के अनुरूप मिला था या नहीं।

रेलवे अधिकारी बोले- कार्यवाहक जिम्मेदारी देने का प्रावधान

एनडब्ल्यूआर जयपुर के सीनियर डीजीएम मिहिर देव ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार किसी कर्मचारी को किसी पद की कार्यवाहक जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, उनके अनुसार इससे कर्मचारी के वेतनमान, भत्तों या अन्य सुविधाओं में बदलाव नहीं होता।उन्होंने कहा कि यदि अजमेर मंडल में ऐसा कोई मामला सामने आया है, तो रेलवे उसे संज्ञान में लेकर जांच कराएगा। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल यह मामला शिकायत और उस पर उठाई गई जांच की मांग के स्तर पर है। ‘प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर’ पदनाम, कर्मचारी की वास्तविक तैनाती और उससे जुड़े भुगतान की स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।CVC और रेलवे स्तर पर यदि रिकॉर्ड की जांच होती है, तो HRMS, सर्विस बुक, ड्यूटी रिकॉर्ड और भुगतान दस्तावेजों से पूरे मामले की स्थिति सामने आ सकती है। फिलहाल शिकायतकर्ता ने सभी संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

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Stv News Rajasthan

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