‘पुलिस पकड़कर नहीं लाई थी’… रितुराज की मौत पर DCP का दावा, CCTV से खुलेगा राज
जयपुर। मुहाना थाने में तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान रितुराज लोहार की मौत के मामले में अब जांच तेज हो गई है। 22 सितंबर को थाने में तबीयत खराब होने के बाद रितुराज को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 15 दिन इलाज के बाद 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि रितुराज को पुलिस पकड़कर थाने नहीं लाई थी। शिकायत करने वाले पक्ष के लोग ही उसे थाने लेकर आए थे। अब थाने में लगे CCTV कैमरों की फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट जांच का अहम हिस्सा होगी।
DCP का दावा- पुलिस पकड़कर थाने नहीं लाई
DCP साउथ राजर्षि राज के अनुसार रितुराज को पुलिस ने पकड़कर थाने नहीं लाया था। उनके मुताबिक शिकायतकर्ता पक्ष के लोग ही उसे थाने लेकर आए थे।DCP ने बताया कि थाने में सभी प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगे हैं। रितुराज के थाने पहुंचने के करीब दो घंटे बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी।पुलिस के अनुसार इसके बाद पुलिसकर्मी उसे निजी अस्पताल लेकर गए। हालत गंभीर होने पर उसे SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां 5 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
थाने में मारपीट से पुलिस ने किया इनकार
पुलिस का कहना है कि रितुराज के साथ थाने में किसी तरह की मारपीट नहीं हुई। पुलिस इस दावे के समर्थन में थाने की CCTV फुटेज को जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कह रही है।अब जांच में यह देखा जाएगा कि रितुराज थाने में कब पहुंचा, उसके साथ कौन-कौन लोग थे और तबीयत बिगड़ने से पहले क्या घटनाक्रम हुआ।
सोना और पैसों के लेनदेन से शुरू हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार पूरे मामले की शुरुआत सोना तस्करी और पैसों के लेनदेन के विवाद से हुई थी। नीमच निवासी प्रहलाद ने शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत के मुताबिक गांव के ललित ने प्रहलाद को बताया था कि प्रकाश विदेश से सोना लेकर आएगा। इससे अच्छा मुनाफा होने की बात कही गई थी। इसके बाद प्रहलाद ने सोना खरीदने के लिए प्रकाश को ऑनलाइन करीब 7.45 लाख रुपए दिए थे।
सोना नहीं मिला तो पैसे वापस मांगने पर विवाद
तय समय पर सोना नहीं मिलने के बाद प्रहलाद ने अपने पैसे वापस मांगे। पुलिस के अनुसार प्रकाश ने रकम लौटाने से इनकार कर दिया।इसके बाद प्रहलाद को जानकारी मिली कि प्रकाश मुहाना क्षेत्र के एक होटल में रुका हुआ है। वह होटल पहुंचा तो कथित तौर पर पता चला कि प्रकाश ने मनोज नाम के एक अन्य व्यक्ति से भी सोना देने के नाम पर पैसे लिए थे।
होटल में बेटे रितुराज को छोड़ गया था पिता
पुलिस के अनुसार 22 सितंबर को प्रकाश अपने बेटे रितुराज को होटल में यह कहकर छोड़ गया था कि वह जल्द वापस आएगा। इसके बाद घटनाक्रम आगे बढ़ा और रितुराज को मुहाना थाने लाए जाने की बात सामने आई।यहीं से उसकी तबीयत बिगड़ने और बाद में अस्पताल में भर्ती होने का मामला जुड़ता है। अब पुलिस और प्रशासनिक जांच इसी घटनाक्रम की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है।
मां ने दर्ज कराई थी FIR
रितुराज की मां हेमा बाई ने 23 सितंबर को मुहाना थाने में FIR दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि रितुराज ने फोन पर उन्हें बताया था कि उसे और उसके पिता को मनोज, लोकेन्द्र, महेश सहित 4-5 लोगों ने बंधक बनाकर रखा है।शिकायत के अनुसार फोन अचानक कट गया था। अगले दिन परिवार को जानकारी मिली कि रितुराज गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल के ICU में भर्ती है।महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती शिकायत में मां ने किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ आरोप नहीं लगाया था। बाद में पुलिस की भूमिका को लेकर अलग-अलग आरोप सामने आए।
मारपीट के आरोपों पर खाचरियावास ने उठाए सवाल
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रितुराज के साथ मारपीट किए जाने के आरोपों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।खाचरियावास ने मुख्यमंत्री से दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलने पर कांग्रेस कार्यकर्ता आंदोलन कर सकते हैं।ये आरोप राजनीतिक बयान और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मानवाधिकार आयोग ने भी शुरू की जांच
मामले को राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान में लिया है। आयोग अध्यक्ष जीआर मूलचंदानी ने महानिरीक्षक हिंगलाज दान और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संध्या यादव को घटना की जांच के निर्देश दिए हैं।आयोग ने घटना के गवाहों और चिकित्सकों से जानकारी लेने के साथ मेडिकल रिपोर्ट की जांच करने को कहा है। इसके अलावा घटना से करीब एक सप्ताह पहले तक की CCTV फुटेज भी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
एंटीवेनम इंजेक्शन और सांप काटने की कहानी पर भी सवाल
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि रितुराज की मौत को लेकर सांप के काटने की कहानी बताई गई। इसके साथ ही एंटीवेनम के 10 इंजेक्शन लगाए जाने और करीब 96 हजार रुपए का बिल होने के दावे भी सामने आए हैं।हालांकि इन दावों की वास्तविकता मेडिकल रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। मानवाधिकार आयोग ने भी मेडिकल दस्तावेजों की जांच को जांच का हिस्सा बनाया है।
अब CCTV और मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी नजर
रितुराज की मौत के मामले में अब कई स्तर पर जांच चल रही है। पुलिस की ओर से CCTV फुटेज उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर भी घटना से जुड़े वीडियो और मेडिकल दस्तावेजों की जांच होगी।सबसे अहम सवाल यह है कि रितुराज थाने कैसे पहुंचा, वहां उसके साथ क्या हुआ और तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था। CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।