अभिजीत दीपके का दावा- ‘भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मिला, लेकिन ठुकरा दिया’
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था और कथित तौर पर दबाव भी बनाया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। दीपके के इन दावों पर भाजपा की ओर से इस खबर के प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘भाजपा में आने का प्रस्ताव मिला’ का दावा
एक मराठी मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान उन्हें भाजपा में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। दीपके के अनुसार, उनका मानना है कि वह अपने विचारों और आंदोलन की दिशा से समझौता नहीं कर सकते। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
परिवार को लेकर दबाव बनाने का आरोप
दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उन्हें और उनके परिवार को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता का हवाला देकर उन्हें डराने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपने रुख पर कायम रहेंगे। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
गृह मंत्री पर लगाए सवाल
अभिजीत दीपके ने आंदोलन को लेकर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ऐसे आरोप लगा रही है, तो संबंधित एजेंसियों को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने गृह मंत्रालय की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर अपनी आपत्ति जताई। इन बयानों पर केंद्र सरकार या गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रामदेव और नई शिक्षा नीति पर भी बोले
दीपके ने योग गुरु बाबा रामदेव के Gen Z युवाओं से जुड़े बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
अभिजीत दीपके के दावों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, भाजपा या संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे मामलों में सभी पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।