‘अभिजीत राजनीति में नहीं जाएगा’, CJP फाउंडर के पिता बोले- मेरा सपना उसे अफसर बनते देखना था
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। आंदोलन खत्म होने के बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा राजनीति में नहीं जाएगा और उनका सपना हमेशा से उसे सिविल सर्विसेज में देखना था। उन्होंने यह भी बताया कि बेटे की उच्च शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन वह आज भी चुका रहे हैं।
‘राजनीति नहीं, सिविल सर्विस मेरा सपना था’
एक इंटरव्यू में भगवान शंकर दीपके ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी पहचान बना लेगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अभिजीत का लक्ष्य राजनीति नहीं है। उनके मुताबिक, परिवार में पहले कभी कोई सक्रिय राजनीति में नहीं रहा और उनकी इच्छा थी कि अभिजीत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जाए। उनका मानना है कि सिविल सर्विस के माध्यम से भी समाज की प्रभावी सेवा की जा सकती है।
आंदोलन के दौरान बेटे की सुरक्षा को लेकर रहे चिंतित
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान वह लगातार अपने बेटे की सेहत और सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे। उन्होंने कहा कि जब अभिजीत की तबीयत खराब होने और बाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं, तो पूरा परिवार परेशान हो गया। उन्होंने बताया कि कई बार उनका मन हुआ कि वह दिल्ली जाकर बेटे को वापस ले आएं, लेकिन छात्रों के प्रति उसके समर्पण को देखते हुए उन्होंने उसका मनोबल बढ़ाने का फैसला किया।
इंजीनियरिंग से पत्रकारिता और फिर विदेश में पढ़ाई
भगवान दीपके के अनुसार, उन्होंने चाहा था कि अभिजीत इंजीनियर बने। इसी उद्देश्य से उसका इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला कराया गया, लेकिन बाद में अभिजीत ने पत्रकारिता में रुचि दिखाई और उसी क्षेत्र में पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने जनसंपर्क (Public Relations) में उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का फैसला किया। पिता ने बताया कि बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था, जिसकी किस्तें वह अब भी चुका रहे हैं।
सोशल मीडिया अभियान से राष्ट्रीय आंदोलन तक का सफर
अभिजीत दीपके की पहल से शुरू हुआ ऑनलाइन अभियान बाद में एक बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुई यह मुहिम धीरे-धीरे व्यापक जनसमर्थन हासिल करती गई और जंतर-मंतर तक पहुंची। आंदोलन के समापन के बाद अब अभिजीत के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन उनके पिता का कहना है कि उनका बेटा राजनीति में नहीं जाएगा और उसका भविष्य किसी अन्य क्षेत्र में ही होना चाहिए।