राजस्थान पंचायत-निकाय चुनावों में खर्च सीमा दोगुनी, सरपंच अब 1 लाख तक कर सकेंगे चुनाव प्रचार….
राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। चुनाव प्रचार में बढ़ती महंगाई और संसाधनों की लागत को देखते हुए आयोग ने विभिन्न पदों के लिए चुनावी खर्च सीमा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
महंगाई के अनुरूप बदली चुनावी खर्च सीमा
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में प्रचार सामग्री, वाहन, सोशल मीडिया और जनसंपर्क गतिविधियों की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में पुरानी खर्च सीमा व्यावहारिक नहीं रह गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा को संशोधित किया है, ताकि उम्मीदवार नियमों के भीतर रहते हुए प्रभावी प्रचार कर सकें।
आयोग ने जारी की नई अधिसूचना
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2014 और 2019 के चुनावों की तुलना में वर्ष 2025 के चुनावों में कई पदों पर खर्च सीमा लगभग दोगुनी कर दी गई है। आयोग का कहना है कि यह निर्णय निष्पक्ष और यथार्थपरक चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करेगा।
नगरीय निकाय चुनावों में बढ़ा बजट
नगर निगम चुनावों में उम्मीदवार अब अधिकतम 3.50 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 2.50 लाख रुपये थी। नगर परिषद चुनावों के लिए खर्च सीमा 2 लाख रुपये और नगर पालिका चुनावों के लिए 1.50 लाख रुपये तय की गई है। शहरी क्षेत्रों में प्रचार माध्यमों की लागत अधिक होने के कारण यह बढ़ोतरी जरूरी मानी जा रही है।
पंचायत चुनावों में सरपंच को बड़ी राहत
पंचायतीराज संस्थाओं में भी खर्च सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम खर्च सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। पंचायत समिति सदस्य अब 1.50 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। वहीं सरपंच पद के लिए खर्च सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में प्रचार को मजबूती मिलेगी।
खर्च का पूरा लेखा-जोखा देना होगा अनिवार्य
राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त शब्दों में स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई खर्च सीमा के बावजूद उम्मीदवारों को अपने प्रत्येक खर्च का पूरा और सही विवरण निर्धारित प्रारूप में दर्ज करना होगा। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद तय समय सीमा के भीतर यह विवरण जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपना अनिवार्य रहेगा।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित खर्च सीमा से अधिक व्यय करता है या खर्च का सही विवरण प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ चुनाव कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही चुनाव प्रक्रिया की सबसे अहम शर्त है।
बढ़ा खर्च, बढ़ी जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि नई खर्च सीमा वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप जरूर है, लेकिन इससे उम्मीदवारों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। चुनावी खर्च का पारदर्शी लेखा-जोखा ही निष्पक्ष और स्वच्छ चुनाव का आधार बनेगा।