अलवर में बेटे की हत्या पर पिता को उम्रकैद, 6 साल बाद आया कड़ा फैसला
अलवर की एडीजे कोर्ट ने 6 साल पुराने जघन्य हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अपने ही 6 वर्षीय बेटे की हत्या करने वाले पिता को आजीवन कारावास की सजा दी है। अदालत ने आरोपी पर 1.51 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला समाज में अपराध के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
2020 की घटना, जहर देकर की थी मासूम की हत्या
यह मामला 19 अगस्त 2020 का है, जब आरोपी पिता ने अपने 6 साल के बेटे कुनाल को जहर देकर गंभीर रूप से बीमार कर दिया था। बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती तौर पर मामला संदिग्ध था, लेकिन बाद में सामने आई परिस्थितियों ने इस घटना को हत्या में बदल दिया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
नाना की शिकायत पर खुला राज
घटना के बाद बच्चे के नाना जगदीश प्रसाद ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए अपने दामाद पर हत्या का आरोप लगाया। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिससे आरोपी की भूमिका स्पष्ट होती गई। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर आरोपी को गिरफ्तार किया और अदालत में चालान पेश किया।
14 गवाह और 26 दस्तावेजों से साबित हुआ अपराध
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी करते हुए 14 गवाहों और 26 दस्तावेजों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सबूत पेश किए। अदालत ने सभी गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। इन ठोस प्रमाणों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और कठोर सजा सुनाने का फैसला किया।
परिवार पर पहले भी हमले के आरोप
मामले में सामने आया कि आरोपी का व्यवहार पहले से ही संदिग्ध और खतरनाक था। मृतक के नाना ने आरोप लगाया कि आरोपी ने घटना से पहले अपनी पत्नी को भी जहर देकर मारने की कोशिश की थी। इसके अलावा उसने अपनी बेटियों को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। हालांकि उस समय इन मामलों में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी, जिससे आरोपी के हौसले बढ़ते गए।
कोर्ट का सख्त संदेश: अपराध पर जीरो टॉलरेंस
अदालत ने इस जघन्य अपराध को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास और 1 लाख 51 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि ऐसे अपराधों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। न्यायालय के इस निर्णय को कानून के सख्त अनुपालन का उदाहरण माना जा रहा है।