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जयपुर में दर्दनाक हादसा: खुले पानी के टैंक में डूबकर 2 मासूमों की मौत

जयपुर के शिप्रापथ इलाके में लापरवाही का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जहां निर्माणाधीन मकान में खुले छोड़े गए पानी के टैंक में गिरने से दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई। हादसे के CCTV फुटेज में उनके आखिरी पल कैद हुए हैं, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

खेल-खेल में चली गई जान, 8 फीट गहरा था टैंक

मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे जगन्नाथपुरी सेकंड कॉलोनी में 5 साल की राधिका और 6 साल की गौसिया घर के पास खेल रही थीं। पास ही एक निर्माणाधीन मकान में करीब 8 फीट गहरा पानी से भरा टैंक बिना ढके छोड़ा गया था। खेलते-खेलते दोनों बच्चियां अनजाने में उसी टैंक में गिर गईं। मौके पर पड़ी उनकी चप्पलें इस दर्दनाक हादसे की मूक गवाह बन गईं। यह घटना साफ तौर पर निर्माण स्थल पर बरती गई गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।

मजदूर परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

दोनों बच्चियां बेहद साधारण परिवारों से थीं। उनके माता-पिता यूपी और बिहार के मूल निवासी हैं और जयपुर में मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। राधिका के पिता दिव्यांग हैं और ट्राईसाइकिल पर मोबाइल कवर बेचते हैं, जबकि गौसिया के पिता पेंटिंग का काम करते हैं। इन परिवारों के लिए उनकी बेटियां ही सबसे बड़ी उम्मीद थीं। अचानक हुए इस हादसे ने न केवल उनके सपनों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

CCTV में कैद हुए आखिरी पल

हादसे से ठीक पहले के CCTV फुटेज सामने आए हैं, जिसमें दोनों बच्चियां हौद के पास खेलती नजर आ रही हैं। वे बेफिक्र होकर टैंक के किनारे घूम रही थीं, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह खेल उनकी जिंदगी का आखिरी पल साबित होगा। यह फुटेज न केवल घटना की पुष्टि करता है, बल्कि सुरक्षा लापरवाही की गंभीरता को भी उजागर करता है।

पुलिस जांच जारी, शिकायत का इंतजार

घटना की सूचना मिलते ही शिप्रापथ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों के शवों को बाहर निकालकर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। पुलिस का कहना है कि अभी तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन मामले की जांच अपने स्तर पर जारी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर लापरवाही का केस बनता है या नहीं।

सवालों के घेरे में निर्माण सुरक्षा

यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को सामने लाता है। खुले गड्ढे, बिना ढके टैंक और अधूरी सुरक्षा व्यवस्था अक्सर इस तरह के हादसों को जन्म देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टैंक को ढक दिया गया होता या सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। अब जरूरत है कि प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती दिखाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

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