दौसा में मुकेश दाधीच का कांग्रेस पर निशाना, बोले- मुस्लिम बहुल इलाकों में कैसे जीत रही पार्टी?
दौसा: राजस्थान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने कांग्रेस पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। दौसा में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चुनाव में वोट चोरी हो रही है, तो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस के उम्मीदवार कैसे जीत रहे हैं? दाधीच ने पूर्व चुनाव आयुक्तों को कांग्रेस में राजनीतिक अवसर मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने राजनीतिक फैसलों पर जवाब देना चाहिए।
दौसा में पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच गुरुवार को दौसा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों की आलोचना की।दाधीच ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय पार्टी को अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य और प्रमाण सामने रखने चाहिए।
पूर्व चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक अवसर मिलने का मुद्दा उठाया
दाधीच ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए पूर्व चुनाव आयुक्तों के राजनीतिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने और एमएस गिल के कांग्रेस से जुड़ने का जिक्र किया।एमएस गिल राज्यसभा सदस्य और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। दाधीच ने सवाल किया कि यदि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह है, तो संवैधानिक पदों पर रहे अधिकारियों को बाद में राजनीतिक अवसर देने के फैसलों पर पार्टी अपना पक्ष स्पष्ट करे।हालांकि, किसी पूर्व अधिकारी का बाद में राजनीति में आना अपने आप में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल का प्रमाण नहीं है। दोनों विषयों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
मतदाता सूची से नाम हटने पर कांग्रेस से मांगा जवाब
दाधीच ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने दावा किया कि सूची से हटाए गए नामों में मृतक, दूसरे स्थानों पर जा चुके और सत्यापन नहीं करा पाने वाले मतदाता भी शामिल हैं।उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस ऐसे नामों को भी मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है? दाधीच ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने के साथ अपात्र और दोहराए गए नामों की जांच भी जरूरी है।हालांकि, नाम हटाने के कारणों और प्रक्रिया का वास्तविक आकलन निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित मतदाताओं की शिकायतों के आधार पर ही किया जा सकता है।
‘वोट चोरी हुई तो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस कैसे जीती?’
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चुनाव में वोटों की चोरी हुई है, तो दूसरे दलों के उम्मीदवार चुनाव कैसे जीत रहे हैं? उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए पूछा कि वहां कांग्रेस के उम्मीदवार कैसे जीत रहे हैं।दाधीच का यह बयान कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। हालांकि, किसी क्षेत्र में किसी पार्टी की जीत या हार अपने आप में मतदाता सूची में अनियमितता होने या नहीं होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे आरोपों की जांच के लिए निर्वाचन रिकॉर्ड, शिकायतें और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं।
भाजपा ने शुरू किया ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान
दाधीच ने बताया कि भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों के जवाब में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत पदयात्राएं, संगोष्ठियां और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।पार्टी का उद्देश्य इन कार्यक्रमों के माध्यम से मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष जनता तक पहुंचाना है। भाजपा कार्यकर्ताओं को भी अभियान के तहत लोगों से संवाद करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
भाजपा नेताओं ने भी रखी अपनी बात
पत्रकार वार्ता को जिले के चुनाव प्रभारी प्रणवेन्द्र शर्मा और भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मी रेला ने भी संबोधित किया। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभूदयाल शर्मा और मीडिया प्रभारी प्रेम हरितवाल सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे।दौसा में हुई इस पत्रकार वार्ता के बाद SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है। इन मुद्दों पर दोनों पक्षों के दावों और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों को साथ रखकर स्थिति का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा।