अलवर के NEB एक्सटेंशन में मकानों के ऊपर से गुजर रही 11 केवी लाइन, हादसे का खतरा
अलवर। शहर के एनईबी एक्सटेंशन में रहने वाले लोगों के लिए घर की छत पर जाना भी चिंता का कारण बन गया है। यहां कई मकानों के ऊपर से 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। लोगों ने हाउसिंग बोर्ड और बिजली निगम की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लाइन को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने या भूमिगत करने की मांग की है। वहीं, बिजली निगम के एक्सईएन महेश देशवाल ने कहा कि भूमिगत केबल के लिए आवेदन कर निर्धारित राशि जमा करानी होगी।
मकानों की छत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन
अलवर के एनईबी एक्सटेंशन में बिजली की 11 केवी लाइन मकानों के बेहद नजदीक से गुजर रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ जगहों पर लाइन मकानों की छत के ऊपर से निकल रही है। ऐसे में छत पर काम करने, मरम्मत कराने या निर्माण गतिविधियों के दौरान दुर्घटना का खतरा बना रहता है।लोगों का कहना है कि घर बनाते समय सुरक्षित बिजली व्यवस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए था। लेकिन कॉलोनी में मकानों के ऊपर से गुजरती हाईटेंशन लाइन अब चिंता का विषय बन गई है। निवासियों को आशंका है कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
हाउसिंग बोर्ड और बिजली निगम की जिम्मेदारी पर सवाल
कॉलोनी में मकानों के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन को लेकर हाउसिंग बोर्ड और बिजली निगम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवासीय क्षेत्र विकसित करते समय बिजली लाइनों की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।रिहायशी इलाके में हाईटेंशन लाइन होने से छत पर दैनिक कामकाज करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे में लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी जोखिम का आकलन करें और समाधान की दिशा में कार्रवाई करें।हालांकि, लाइन किस समय और किन परिस्थितियों में बिछाई गई थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए जिम्मेदारी और नियमों के पालन से जुड़े पहलुओं की पुष्टि संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
नई लाइन और लोड बढ़ने पर भूमिगत व्यवस्था की जरूरत
स्थानीय स्तर पर बिजली लाइन को भूमिगत करने की मांग उठाई जा रही है। निवासियों का कहना है कि मकानों के ऊपर से गुजरती हाईटेंशन लाइन के कारण परिवारों को लगातार चिंता बनी रहती है।लोग चाहते हैं कि बिजली निगम और हाउसिंग बोर्ड मिलकर मौके की स्थिति का निरीक्षण करें। इसके बाद तकनीकी और सुरक्षा मानकों के अनुरूप लाइन को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने या भूमिगत करने की संभावना पर विचार किया जाए।नई लाइन बिछाने या मौजूदा लाइन में बदलाव के दौरान कौन-से नियम लागू होते हैं, यह संबंधित तकनीकी मानकों और विभागीय स्वीकृतियों पर निर्भर करता है। इस मामले में भी वास्तविक स्थिति आधिकारिक जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
बिजली निगम के एक्सईएन महेश देशवाल ने क्या कहा?
बिजली निगम के एक्सईएन महेश देशवाल के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बिजली की लाइन को भूमिगत करवाना चाहता है तो उसे आवेदन करना होगा और निर्धारित राशि जमा करानी होगी।देशवाल ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की ओर से भूमिगत केबल डालने का कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। उनके बयान के अनुसार, फिलहाल विभाग के पास इस संबंध में हाउसिंग बोर्ड का प्रस्ताव उपलब्ध नहीं है।इस बयान के बाद अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आवासीय क्षेत्र में लाइन की मौजूदा स्थिति का समाधान किस प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है और इसके लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय कैसे होगा।
कॉलोनी निवासी ने जताई बड़े हादसे की आशंका
कॉलोनी निवासी द्वारका प्रसाद शर्मा ने कहा कि 11 केवी की बिजली लाइन मकानों को छू रही है और इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।उन्होंने मांग की कि बिजली निगम और हाउसिंग बोर्ड मिलकर बिजली लाइन को भूमिगत करने की दिशा में काम करें, ताकि लोगों को खतरे से राहत मिल सके।स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर जल्द ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, लाइन की वास्तविक स्थिति, निर्धारित सुरक्षा दूरी और आवश्यक तकनीकी उपायों का आकलन संबंधित विशेषज्ञों और विभागीय निरीक्षण के आधार पर होना चाहिए।
सुरक्षित बिजली व्यवस्था के लिए समाधान की मांग
एनईबी एक्सटेंशन में हाईटेंशन लाइन को लेकर उठी चिंता ने आवासीय क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा की अहमियत को सामने ला दिया है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर जोखिम का आकलन करें और उचित समाधान निकालें।यदि तकनीकी रूप से संभव और नियमों के अनुरूप हो, तो लाइन को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने या भूमिगत करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल हाउसिंग बोर्ड की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने और बिजली निगम की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।