करवा चौथ 2026: 8 साल से चारपाई पर पति, तीन बच्चों की जिम्मेदारी; सरिता सैनी का संघर्ष बना मिसाल
झुंझुनूं। करवा चौथ पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बाघोली गांव के रामनगर की सरिता सैनी के लिए पति की सलामती की कामना आठ साल से हर दिन की जिम्मेदारी बनी हुई है। सड़क हादसे में पति रतनलाल के गंभीर रूप से घायल होने के बाद से सरिता उनकी देखभाल कर रही हैं। तीन बच्चों की परवरिश, परिवार की आर्थिक तंगी और उपचार की चिंता के बीच उनका संघर्ष जारी है। सरिता के लिए करवा चौथ केवल एक दिन का व्रत नहीं, बल्कि जीवनसाथी का साथ निभाने का संकल्प है।
2018 के सड़क हादसे ने बदल दी परिवार की जिंदगी
सरिता सैनी ने बताया कि उनकी शादी 26 नवंबर 2010 को रामनगर निवासी रतनलाल सैनी से हुई थी। परिवार सामान्य और खुशहाल जीवन जी रहा था। रतनलाल एलएनटी कंपनी में चालक के रूप में काम करते थे। परिवार की आर्थिक जरूरतें भी उनकी कमाई से पूरी होती थीं।लेकिन 26 अक्टूबर 2018 को हुए सड़क हादसे ने परिवार की जिंदगी बदल दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद से रतनलाल चारपाई पर हैं। उनके उपचार के लिए सरिता ने अपनी जमा पूंजी खर्च की और कर्ज लेकर निजी तथा सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया। इसके बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
आठ साल से पति की सेवा में जुटी हैं सरिता
रतनलाल की देखभाल की जिम्मेदारी सरिता के कंधों पर है। पति की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ उन्हें घर के दूसरे काम भी संभालने पड़ते हैं। दिन का बड़ा हिस्सा पति की सेवा में बीत जाता है।ऐसे हालात में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती है। आर्थिक संसाधन सीमित हैं, लेकिन सरिता ने कठिन परिस्थितियों में भी पति का साथ नहीं छोड़ा। उनके लिए यह जिम्मेदारी केवल बीमारी के दौरान देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वैवाहिक जीवन में साथ निभाने का संकल्प भी है।
तीन बच्चों की परवरिश और पढ़ाई की चिंता
सरिता और रतनलाल के दो बेटे और एक बेटी हैं। तीनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। पति की देखभाल के साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य की चिंता भी सरिता को लगातार बनी रहती है।परिवार के सामने एक तरफ उपचार और रोजमर्रा के खर्च हैं, तो दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की जिम्मेदारी है। सीमित आय के कारण इन जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं है। इसके बावजूद सरिता परिवार को संभालने का प्रयास कर रही हैं।
बुजुर्ग ससुर मजदूरी कर परिवार को दे रहे सहारा
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण सरिता के बुजुर्ग ससुर बंशीधर भी मेहनत-मजदूरी कर परिवार की मदद कर रहे हैं। ग्रामीण भी अपनी क्षमता के अनुसार परिवार का सहयोग करते हैं।हालांकि, लंबे समय से चल रहे उपचार और घर की जिम्मेदारियों के कारण परिवार की आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं। सरिता के लिए पति की देखभाल के साथ बच्चों की जरूरतें पूरी करना लगातार संघर्ष का विषय है।
सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद
सरिता के अनुसार, परिवार को बीपीएल सूची में शामिल होने और पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की जरूरत है। उनका कहना है कि मनरेगा के तहत मजदूरी का अवसर भी समय पर नहीं मिल पाता। इससे परिवार की आय पर असर पड़ता है।ऐसे में परिवार को सरकारी सहायता मिलने की उम्मीद है। यदि पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ और रोजगार के अवसर मिलते हैं, तो उपचार तथा बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों में कुछ राहत मिल सकती है।
सरिता का संदेश: मुश्किल वक्त में जीवनसाथी का साथ न छोड़ें
सरिता का कहना है कि पति-पत्नी को कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। उनके अनुसार, जीवन में हालात कैसे भी हों, जीवनसाथी का साथ निभाना जरूरी है।उनकी कहानी करवा चौथ के पारंपरिक अर्थ को एक अलग दृष्टिकोण देती है। जहां इस पर्व पर पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है, वहीं सरिता पिछले आठ साल से अपने पति की देखभाल के जरिए उस कामना को रोजमर्रा के जीवन में निभा रही हैं।
करवा चौथ पर सरिता के संघर्ष की चर्चा
झुंझुनूं की सरिता सैनी की कहानी परिवार, जिम्मेदारी और कठिन समय में साथ निभाने की मिसाल के रूप में सामने आई है। सड़क हादसे के बाद पति की देखभाल, तीन बच्चों की परवरिश और आर्थिक चुनौतियों के बीच उनका संघर्ष जारी है।परिवार को अब उपचार और सरकारी सहायता के मामले में राहत की उम्मीद है। सरिता की प्राथमिकता पति की देखभाल और बच्चों का भविष्य है। उनके लिए करवा चौथ केवल एक दिन की परंपरा नहीं, बल्कि हर दिन निभाया जाने वाला साथ है।