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Jaipur News: स्पिक मैके के आयोजन में पुरुलिया छऊ नृत्य, कलाकारों ने जीवंत किए रामायण के प्रसंग

जयपुर के वैशाली नगर स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में स्पिक मैके के सहयोग से पारंपरिक पुरुलिया छऊ नृत्य का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार तारापद राजक और उनकी टीम ने मुखौटों, युद्धक मुद्राओं और पारंपरिक संगीत के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। कलाकारों ने देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय की गाथा भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को भारतीय लोककला, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं से परिचित कराया गया।

जयपुर के डीएवी स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम

जयपुर के वैशाली नगर स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्पिक मैके के सहयोग से हुए इस आयोजन में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भारत की पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं को करीब से देखने का अवसर मिला।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध मुखौटा नृत्य शैली पुरुलिया छऊ रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकार तारापद राजक और उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

पुरुलिया छऊ नृत्य से रामायण के प्रसंग हुए जीवंत

कलाकारों ने नृत्य-नाटिका के माध्यम से रामायण के कई पौराणिक प्रसंग प्रस्तुत किए। इसके साथ ही देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने और आसुरी शक्तियों पर विजय की गाथा भी दिखाई गई।नर्तकों की ऊर्जावान शारीरिक मुद्राओं, लयबद्ध पदचाप और भावपूर्ण अभिनय ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। पारंपरिक वेशभूषा और मंच पर कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय लोककला की विशेषताओं से परिचित कराया।

रंग-बिरंगे मुखौटे और युद्धक मुद्राएं रहीं आकर्षण

पुरुलिया छऊ नृत्य अपनी विशिष्ट मुखौटा कला और युद्धक शैली की शारीरिक मुद्राओं के लिए जाना जाता है। कार्यक्रम में कलाकारों ने बड़े और रंग-बिरंगे मुखौटों का इस्तेमाल किया। इन मुखौटों की बनावट और प्रस्तुति ने विद्यार्थियों का विशेष ध्यान खींचा।पारंपरिक ढोल, शहनाई और अन्य वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ कलाकारों ने युद्ध के दृश्य और पौराणिक कथाओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस दौरान तेज गति, तालमेल और नाटकीय मुद्राओं ने प्रस्तुति को जीवंत बनाया।कार्यक्रम ने मनोरंजन के साथ भारत की पारंपरिक कलाओं को समझने और उनके संरक्षण के महत्व को भी सामने रखा।

प्रधानाचार्य राजन गौतम ने कलाकारों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजन गौतम ने स्पिक मैके की प्रतिनिधि वंदना और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य कलाकार तारापद राजक और उनके साथ आए कलाकारों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।प्रधानाचार्य ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से विद्यार्थियों में भारतीय कला और विरासत के प्रति सम्मान विकसित होता है। उन्हें पारंपरिक कला शैलियों को प्रत्यक्ष देखने और समझने का अवसर मिलता है। इससे उनकी सांस्कृतिक जागरूकता और कलात्मक अभिरुचि को बढ़ावा मिलता है।

डॉ. स्वाति चौधरी ने दिया धन्यवाद

विद्यालय की गतिविधि प्रभारी डॉ. स्वाति चौधरी ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पिक मैके की टीम और कलाकारों के योगदान के लिए आभार जताया।उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अभिभावकों का भी धन्यवाद किया। उनके अनुसार, इस तरह के आयोजनों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों की भागीदारी सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है।

विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल

डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल का यह आयोजन शिक्षा के साथ सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रयास रहा। पुरुलिया छऊ नृत्य के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारतीय लोककला की विविधता, पारंपरिक संगीत और पौराणिक कथाओं की मंचीय अभिव्यक्ति को करीब से देखा।ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और पारंपरिक कला रूपों के प्रति रुचि विकसित करने में मदद करते हैं।

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Stv News Rajasthan

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