Indian Railway News: जयपुर जंक्शन पर महिला कोचों में पुरुषों का कब्जा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जयपुर जंक्शन पर महिला आरक्षित रेल कोचों में पुरुष यात्रियों के अनधिकृत प्रवेश का मामला सामने आया है। एक मीडिया पड़ताल के दौरान आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों के महिला कोचों में पुरुष यात्री बैठे और कुछ सीटों पर लेटे मिले। एक महिला यात्री के विरोध के बावजूद पुरुष कोच में चढ़ गया। मौके पर आरपीएफ स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद कुछ जगह रोकटोक नहीं दिखी। रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। आरपीएफ के अनुसार, जयपुर जंक्शन पर पिछले महीने ऐसे 31 मामले दर्ज किए गए।
जयपुर जंक्शन पर महिला आरक्षित कोचों की पड़ताल में क्या दिखा?
जयपुर जंक्शन पर महिला यात्रियों की सुरक्षा और आरक्षित कोचों में नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को तीन घंटे तक आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों के महिला आरक्षित कोचों की पड़ताल की गई।इस दौरान कई कोचों में महिलाओं की तुलना में पुरुष यात्रियों की संख्या अधिक दिखाई दी। कुछ पुरुष आरक्षित सीटों पर बैठे थे, जबकि कुछ सीटों पर लेटे हुए थे। कोच के दरवाजों के पास भी पुरुष यात्रियों की भीड़ नजर आई।रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भीड़ को वजह बताकर पुरुष यात्री महिला कोचों में प्रवेश कर रहे थे। इससे महिला यात्रियों के लिए आरक्षित व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हुए।
जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट के महिला कोच में पुरुषों की भीड़
रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर करीब पौने दो बजे प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर खड़ी जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन के महिला आरक्षित कोच में केवल तीन महिलाएं बैठी थीं। वहीं, करीब 10 से 15 पुरुष यात्री कोच में मौजूद थे।कुछ पुरुष सीटों पर सोते नजर आए, जबकि कुछ महिला यात्रियों के पास बैठे थे। इस स्थिति ने महिला कोच के आरक्षण नियमों के पालन पर सवाल खड़े किए।महिला यात्रियों के लिए आरक्षित कोच का उद्देश्य उन्हें यात्रा के दौरान अलग और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराना है। ऐसे में अनधिकृत प्रवेश से महिलाओं को असुविधा हो सकती है।
जोधपुर-वाराणसी ट्रेन में महिला यात्री के विरोध के बाद भी नहीं रुका पुरुष
पड़ताल के दौरान प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर जोधपुर से जयपुर पहुंची जोधपुर-वाराणसी ट्रेन के महिला आरक्षित कोच में भी पुरुष यात्रियों की भीड़ दिखाई दी।रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन में चढ़ते समय एक महिला यात्री ने पुरुष को कोच में प्रवेश करने से रोका। इसके बावजूद वह नहीं माना और कोच में चढ़ गया। इसके बाद चार-पांच अन्य युवक भी अंदर आ गए।इस घटना से यह सवाल उठा कि महिला यात्रियों के विरोध के बावजूद नियमों का उल्लंघन होने पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई। आरक्षित कोचों में निगरानी और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
श्रीगंगानगर-बठिंडा-अंबाला ट्रेन में भी दिखे पुरुष यात्री
पड़ताल में प्लेटफॉर्म नंबर-1बी पर खड़ी श्रीगंगानगर-बठिंडा-अंबाला ट्रेन के महिला आरक्षित कोच में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, वहां केवल चार-पांच महिलाएं थीं, जबकि अधिकांश सीटों पर पुरुष यात्री बैठे हुए थेकोच के गेट के पास भी पुरुष यात्रियों की भीड़ थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उस समय आरपीएफ स्टाफ मौके पर मौजूद था, लेकिन किसी ने यात्रियों को रोकने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया।इन घटनाओं ने महिला कोचों में निगरानी व्यवस्था और नियमों के प्रभावी पालन की जरूरत को रेखांकित किया है।
रेलवे अधिनियम की धारा 162 में कार्रवाई का प्रावधान
महिला यात्रियों के लिए आरक्षित कोच में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने पर रेलवे अधिनियम की धारा 162 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, इस उल्लंघन पर जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये किए जाने का उल्लेख है।हालांकि, जुर्माने का प्रावधान होने के बावजूद नियमों का उल्लंघन सामने आने से निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।महिला आरक्षित कोचों में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए नियमित जांच, शिकायतों पर त्वरित प्रतिक्रिया और नियमों की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाना जरूरी है।
कुछ ट्रेनों में महिला कोच नहीं मिलने की शिकायत
पड़ताल के दौरान वाराणसी-साबरमती-लखनऊ और उदयपुर-जयपुर ट्रेन में अलग से महिला आरक्षित कोच नहीं मिलने की बात भी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग ट्रेनों में महिला कोच की व्यवस्था में अंतर होने से यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर सही कोच तलाशने में परेशानी हो सकती है।इसके अलावा, कुछ ट्रेनों में दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित कोचों में भी सामान्य यात्रियों के सफर करने की बात कही गई। इससे आरक्षित सुविधाओं के सही उपयोग और निगरानी की आवश्यकता सामने आती है।महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए निर्धारित सुविधाओं का लाभ संबंधित यात्रियों तक पहुंचे, इसके लिए रेलवे को कोच की स्थिति और प्रवेश व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है।
आरपीएफ का दावा- पिछले महीने दर्ज किए गए 31 मामले
जयपुर जंक्शन आरपीएफ थाने के इंचार्ज प्रदीप कुमार के अनुसार, महिला आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश के मामलों में नियमित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि शिकायतें कम मिलने के बावजूद रूटीन जांच के दौरान भी ऐसे मामले सामने आते हैं।उनके मुताबिक, पिछले महीने जयपुर जंक्शन पर 31 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले महीनों की तुलना में दोगुने थे। उन्होंने त्योहारी सीजन में विशेष अभियान चलाने की बात भी कही।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विशेष जांच अभियान के जरिए महिला आरक्षित कोचों में नियमों का पालन कितना सुनिश्चित किया जाता है।
महिला यात्रियों की सुविधा के लिए निगरानी जरूरी
जयपुर जंक्शन पर सामने आई स्थिति महिला यात्रियों के लिए आरक्षित कोचों में नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए केवल जुर्माने का प्रावधान पर्याप्त नहीं है। नियमित निगरानी और उल्लंघन पर समय रहते कार्रवाई भी जरूरी है।रेलवे और आरपीएफ की जिम्मेदारी है कि महिला यात्रियों को आरक्षित सुविधा का लाभ मिले और शिकायतों पर उचित कार्रवाई हो। त्योहारी सीजन में यात्रियों की भीड़ बढ़ने के साथ ऐसी व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है।