‘हनुमान अंश’ के 3 मिनट के रोल ने बदली पहचान, अब ‘रामायण’ में केवट बनेंगे गजेंद्र सुथार
बालोतरा। फिल्मों में कई बार कुछ मिनट का किरदार भी कलाकार की पूरी पहचान बदल देता है। बालोतरा के अभिनेता गजेंद्र सुथार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उन्होंने चाय बेचने वाले एक छोटे से किरदार को निभाया। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी करीब साढ़े तीन मिनट की थी, लेकिन संवाद और अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींच लिया।फिल्म में उनके किरदार का एक संवाद सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चा में आया। इसके बाद गजेंद्र सुथार की पहचान बालोतरा से निकलकर देशभर के दर्शकों तक पहुंची। अब उनके करियर में एक और बड़ा पड़ाव जुड़ गया है। वह रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर फिल्म ‘रामायण’ में केवट की भूमिका निभाते नजर आएंगे।मुंबई में रहकर अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे गजेंद्र हाल ही में बालोतरा पहुंचे। यहां उन्होंने अपने अभिनय सफर, ‘हनुमान अंश’ की शूटिंग और आने वाले प्रोजेक्ट्स से जुड़े अनुभव साझा किए।
तीन मिनट के किरदार ने दिलाई बड़ी पहचान
गजेंद्र सुथार के मुताबिक ‘हनुमान अंश’ में उनका किरदार बहुत बड़ा नहीं था। फिल्म में वह चाय वाले की भूमिका में नजर आए। इस किरदार को बाबा नीम करोली के एक रूप से जोड़े जाने की बात भी फिल्म की कहानी में सामने आती है।गजेंद्र के लिए सबसे खास बात यह रही कि इतने छोटे स्क्रीन टाइम के बावजूद दर्शकों ने किरदार को याद रखा। उनका एक संवाद भी काफी चर्चा में आया।अभिनेता का कहना है कि आमतौर पर दर्शक लंबे समय तक दिखाई देने वाले किरदारों को ज्यादा याद रखते हैं। लेकिन ‘हनुमान अंश’ में उनका छोटा सा किरदार ही उनकी पहचान का अहम हिस्सा बन गया।
शुरुआत में फिल्म की सफलता को लेकर थी चिंता
गजेंद्र ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के शुरुआती दिनों में उन्हें उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। शुरुआती तीन दिनों की कम कमाई के बाद उन्हें लगा कि शायद फिल्म दर्शकों तक अपनी पकड़ नहीं बना पाएगी।लेकिन इसके बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ी। दर्शकों की संख्या बढ़ी और फिल्म को लेकर चर्चा भी तेज हुई। गजेंद्र के अनुसार, उन्हें अपने किरदार के लिए दर्शकों से जिस तरह का प्यार मिला, वह उनके लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं था।उन्होंने फिल्म की सफलता को अपनी आस्था से भी जोड़ा और इसे बाबा की कृपा बताया।
अब ‘रामायण’ में निभाएंगे केवट का किरदार
‘हनुमान अंश’ के बाद गजेंद्र सुथार के करियर में एक और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जुड़ गया है। वह बड़े बजट की फिल्म ‘रामायण’ में केवट की भूमिका निभाएंगे।फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। गजेंद्र के लिए केवट का किरदार इसलिए भी खास है, क्योंकि रामायण की कथा में केवट का प्रसंग भगवान राम के वनवास से जुड़ा महत्वपूर्ण हिस्सा है।गजेंद्र ने बताया कि इसके अलावा वह ‘बॉम्बे कैफे’ नाम के एक अन्य प्रोजेक्ट में भी नजर आएंगे।
‘हनुमान अंश’ आज भी दिल के करीब
कई फिल्मों में काम करने के बावजूद गजेंद्र सुथार ‘हनुमान अंश’ को अपने करियर का विशेष प्रोजेक्ट मानते हैं। उनके मुताबिक फिल्म ने उन्हें ऐसी पहचान दी, जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी।गजेंद्र खुद को हनुमानजी का उपासक बताते हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि एक संकल्प के तहत वह 13 महीने तक हनुमान चालीसा का पाठ कर चुके हैं।उनके लिए अभिनय और आस्था दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि वह ‘हनुमान अंश’ को अपने लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि विशेष अनुभव मानते हैं।
भारतीय संस्कृति पर फिल्में बननी चाहिए
गजेंद्र सुथार का मानना है कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़े विषयों पर लगातार फिल्में बननी चाहिए। उनके अनुसार ऐसी फिल्मों के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव देश के बाहर भी बढ़ रहा है। ऐसे में भारतीय परंपराओं और सकारात्मक संदेशों से जुड़ी कहानियों को फिल्मों के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है।उनके मुताबिक मनोरंजन के साथ दर्शकों को अच्छा संदेश देने वाली फिल्मों का निर्माण भी जरूरी है।
‘हनुमान अंश’ के सेट पर था सात्विक माहौल
गजेंद्र ने फिल्म की शूटिंग से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उनके अनुसार ‘हनुमान अंश’ के सेट का माहौल सामान्य फिल्म सेट से अलग था।उन्होंने बताया कि सेट पर सात्विक भोजन बनाया जाता था। शूटिंग शुरू करने और पैकअप के समय हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था। इससे पूरे सेट का माहौल आध्यात्मिक बना रहता था।गजेंद्र के मुताबिक शूटिंग के दौरान कई बार लंगूर और बंदर भी सेट पर आकर शांत बैठे दिखाई दिए।
मूर्ति रखते समय लंगूर के पहुंचने का अनुभव
गजेंद्र ने शूटिंग के दौरान का एक अनुभव भी बताया। उनके अनुसार सेट पर हनुमानजी की मूर्ति रखी जा रही थी। उसी दौरान एक लंगूर वहां आकर बैठ गया।अभिनेता के मुताबिक वह लंगूर कुछ समय तक वहीं बैठा रहा और जयकारे होने तक वहां मौजूद रहा। इसके बाद वह वहां से चला गया।गजेंद्र इस घटना को अपनी आस्था से जोड़कर देखते हैं। उनके लिए फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसे अनुभव यादगार रहे।
बालोतरा से मुंबई तक का सफर
बालोतरा जैसे शहर से निकलकर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचना गजेंद्र सुथार के लिए आसान सफर नहीं रहा। लेकिन छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करते हुए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश जारी रखी।‘हनुमान अंश’ के कुछ मिनटों के किरदार ने उन्हें वह पहचान दी, जिसका इंतजार एक कलाकार लंबे समय तक करता है। अब ‘रामायण’ जैसी बड़े स्तर की फिल्म में केवट का किरदार उनके करियर की अगली महत्वपूर्ण कड़ी बनने जा रहा है।गजेंद्र के लिए यह सफर अभी जारी है। बालोतरा से मुंबई और फिर बड़े पर्दे तक पहुंची उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी छोटा किरदार भी कलाकार के लिए बड़ी पहचान का रास्ता खोल सकता है।