25 लाख रिश्वत लेने के बाद बचने की कोशिश में था GST अधीक्षक, श्वान के साथ फोटो से हुई पहचान
राजस्थान में 25 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार जीएसटी अधीक्षक सांवल राम को पकड़ने में एक फोटो अहम कड़ी बनी। एसीबी टीम के पास आरोपी का स्पष्ट चेहरा नहीं था। इसी दौरान मुख्यालय से निगरानी कर रहे डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने श्वान के साथ आरोपी की एक फोटो टीम को भेजी। फोटो के जरिए उसकी पहचान हुई। इसके बाद एसीबी ने सुकेत में उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले में दो कथित दलाल अनिल पारीक और सुशील पारीक को भी पकड़ा गया है।
रिश्वत की रकम लेने के बाद बदली लोकेशन
एसीबी के अनुसार रिश्वत की रकम लेने के बाद सांवल राम लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। सोमवार को वह उदयपुर से झालावाड़ की ओर चला गया। रात उसने झालावाड़ में बिताई।मंगलवार को उदयपुर लौटते समय उसकी लोकेशन सुकेत में मिली। एसीबी टीम ने पहले कथित दलाल को पकड़ा। इसके बाद फोटो के आधार पर जीएसटी अधीक्षक की पहचान की गई और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
श्वान के साथ फोटो बनी अहम सुराग
एसीबी की कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आरोपी की श्वान के साथ वाली फोटो बनी। निगरानी के दौरान टीम को आरोपी की पहचान को लेकर चुनौती थी। उसके चेहरे की स्पष्ट तस्वीर टीम के पास उपलब्ध नहीं थी।मुख्यालय से भेजी गई फोटो ने इस समस्या को दूर कर दिया। टीम ने फोटो के आधार पर आरोपी की पहचान की। इसके बाद सुकेत में कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया गया।
घर की तलाशी में नकदी और जेवर बरामद
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने उदयपुर स्थित सांवल राम के आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान करीब 17 लाख रुपए नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है।इसके अलावा करीब 17 लाख रुपए कीमत के सोने के आभूषण और लगभग 75 हजार रुपए के चांदी के जेवर भी मिले। एसीबी इन संपत्तियों और नकदी के स्रोत की भी जांच कर रही है।
तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा
25 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में सांवल राम सहित दोनों कथित दलालों को अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने तीनों आरोपियों को 14 अक्टूबर तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।एसीबी ने जीएसटी अधीक्षक और दलाल अनिल पारीक से रिश्वत से जुड़ी बातचीत को लेकर आमने-सामने पूछताछ भी की।
पहले 60 लाख रुपए मांगने का आरोप
परिवादी ने एसीबी को बताया कि उसकी दो रजिस्टर्ड फर्म हैं। आरोप है कि एक फर्म की रिकवरी राशि जारी करने, शो-कॉज नोटिस और सम्मन के निस्तारण के लिए रिश्वत मांगी गई।इसके अलावा दूसरी फर्म का खाता सक्रिय करने के बदले भी रकम मांगे जाने का आरोप है। परिवादी के अनुसार अधिकारी और कथित दलालों ने कुल 60 लाख रुपए की मांग की थी। एसीबी अब इस पुराने लेनदेन के आरोपों की भी जांच करेगी।