7 साल बाद झुंझुनूं ज्वेलर्स हत्याकांड में फैसला, 5 दोषियों को उम्रकैद
झुंझुनूं के माननगर में करीब सात साल पहले हुए ज्वेलर्स जतिन सोनी हत्याकांड में अदालत ने फैसला सुनाया है। अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2, झुंझुनूं की अदालत ने डकैती और हत्या के मामले में पांच आरोपियों को दोषी माना। अदालत ने दीपक पहल, योगेश कुमार, विनोद कुमार, अंकित कुमार और प्रताप सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। वहीं मामले में आरोपी प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।
ज्वेलरी शोरूम में घुसकर की थी लूट
मामला 15 सितंबर 2019 का है। माननगर में स्काईलाइन अस्पताल के पास जतिन सोनी की ज्वेलरी की दुकान थी। दोपहर के समय हथियारबंद बदमाश दुकान में पहुंचे थे। उनके पास पिस्टल थी। बदमाशों ने दुकान में घुसते ही जतिन को हथियार दिखाकर धमकाया।आरोपियों ने दुकान से आभूषण बैग में भरवाए। जतिन के गले से चेन भी उतरवाई गई। बदमाशों ने दुकान में लगे सीसीटीवी की डीवीआर भी अपने कब्जे में लेने की कोशिश की। वारदात के दौरान दुकान में मौजूद कर्मचारी को भी धमकाया गया।
भागने की कोशिश में जतिन को लगी गोली
लूट के दौरान जतिन ने बदमाशों से बचने का प्रयास किया। वह दुकान से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान एक आरोपी ने उनका पीछा किया और गोली चला दी। गोली लगने से जतिन गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गए।परिजन उन्हें इलाज के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल लेकर पहुंचे। करीब 25 दिनों तक उनका उपचार चला। परिवार को उम्मीद थी कि जतिन ठीक होकर घर लौटेंगे। लेकिन 9 अक्टूबर 2019 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
बेटे की मौत के बाद पिता ने भी गंवाई जान
जतिन की मौत के बाद उनके पिता चंद्रप्रकाश सोनी भी गहरे सदमे में चले गए। परिवार पहले ही बेटे के इलाज और हत्याकांड की पीड़ा से गुजर रहा था। बेटे की मौत के कुछ समय बाद चंद्रप्रकाश ने जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।इस घटना ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। एक ही वारदात में परिवार ने बेटे और पिता दोनों को खो दिया।
39 गवाहों और 210 दस्तावेजों पर हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 39 गवाह पेश किए। इसके अलावा 210 दस्तावेज भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए गए। राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक नंदकिशोर शर्मा ने मामले में पैरवी की।अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पांच आरोपियों को दोषी माना। दीपक पहल, योगेश कुमार, विनोद कुमार, अंकित कुमार उर्फ मीठू और प्रताप सिंह को उम्रकैद की सजा दी गई।
एक आरोपी को अदालत ने किया बरी
मामले में आरोपी प्रमोद कुमार उर्फ धोलिया को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। वहीं पुलिस ने मामले की जांच के बाद छह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर वारदात से जुड़े आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की।पुलिस के अनुसार मामले में कथित मास्टरमाइंड योगेश को करीब पांच महीने बाद पकड़ा गया था। वह गुजरात में छिपा हुआ था और बाद में बीकानेर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
फैसले के बाद भी परिवार का नुकसान कायम
अदालत के फैसले से मामले की कानूनी प्रक्रिया में अहम पड़ाव आया है। हालांकि जतिन के परिवार के लिए सात साल पहले हुआ नुकसान वापस नहीं हो सकता। हत्याकांड के बाद स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखा गया था। जतिन की मौत के बाद विरोध में रोड जाम किया गया था। कई कस्बों में बाजार बंद रखे गए थे।